Tata Communications ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में अपने EBITDA में **21%** का जोरदार उछाल दर्ज किया है। कंपनी अपने डिजिटल सेगमेंट में घाटे को कम करने में सफल रही है, लेकिन इसके बावजूद मार्केट एक्सपर्ट्स अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
ऑपरेशंस में दम
Tata Communications का इस तिमाही का प्रदर्शन काफी दमदार रहा है। कंपनी का EBITDA पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 21% बढ़कर आया है, और इसके साथ ही कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन में भी सुधार होकर यह 21.3% पर पहुंच गया है। कंपनी फिलहाल एक बड़े बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन से गुजर रही है, जिसमें वे ट्रेडिशनल वॉयस बिजनेस से हटकर क्लाउड सॉल्यूशंस, साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी हाई-वैल्यू सर्विसेज पर फोकस कर रहे हैं।
डिजिटल पोर्टफोलियो की चुनौती
कंपनी के डिजिटल पोर्टफोलियो में साल-दर-साल 19% की ग्रोथ देखी गई है। हालांकि, नई सर्विसेज को डेवलप करने और अधिग्रहणों (Acquisitions) के चलते कंपनी के मुनाफे पर दबाव बना रहता था, लेकिन इस बार अच्छी खबर यह है कि कंपनी ने डिजिटल सेगमेंट के घाटे को पिछली तिमाही के मुकाबले आधा कर दिया है। मैनेजमेंट के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में उनके ऑर्डर बुक में डबल डिजिट की ग्रोथ हो रही है।
ब्रोकरेज की क्या है राय?
शानदार नतीजों के बावजूद ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने स्टॉक पर 'न्यूट्रल' रेटिंग बरकरार रखी है। उन्होंने शेयर के लिए ₹1,980 का टारगेट प्राइस सेट किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी जिस तरह से डिजिटल विस्तार कर रही है, उसमें मुनाफे की निरंतरता (Sustained Profitability) को साबित करना अभी बाकी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इस बदलाव के दौर में कुछ रिस्क भी शामिल हैं। एंटरप्राइज कनेक्टिविटी और क्लाउड मार्केट में मुकाबला बेहद कड़ा है। नई टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च से कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है। आने वाले समय में निवेशकों को यह देखना होगा कि डिजिटल सेगमेंट कितनी जल्दी 'ब्रेक-ईवन' (Break-even) हासिल करता है और कंपनी कॉस्ट कंट्रोल के साथ रेवेन्यू कैसे स्केल करती है।
