रेवेन्यू ग्रोथ ने टॉप लाइन को संभाला
Tata Communications का फाइनेंशियल ईयर 26 की चौथी तिमाही का अंत रेवेन्यू में बढ़त के साथ हुआ, जिसका मुख्य श्रेय इसके डिजिटल और डेटा सर्विसेज की बढ़ती मांग को जाता है। लेकिन, कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि की तुलना में काफी गिर गया। यह गिरावट आंशिक रूप से पिछले साल के नतीजों में एसेट की बिक्री से हुए बड़े एकमुश्त फायदों के कारण थी, वहीं इस साल के नंबरों पर बढ़ी हुई ऑपरेटिंग कॉस्ट का असर दिखा। एनालिस्ट्स इस पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं। अप्रैल 2026 के अंत में स्टॉक लगभग ₹1,515-₹1,525 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। बाजार सिर्फ रेवेन्यू ग्रोथ से ज्यादा, प्रॉफिट मार्जिन में स्पष्ट सुधार की उम्मीद कर रहा है ताकि स्टॉक में और तेजी आ सके।
मार्केट पोजीशन और वैल्यूएशन पर चिंता
कंपनी भारत के IT और बिजनेस सर्विसेज मार्केट में काम करती है, जिसके 2029 तक $21.8 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल टूल्स का बढ़ता इस्तेमाल, साथ ही बेहतर साइबरसिक्योरिटी और AI की ज़रूरतें ग्रोथ को बढ़ाने वाले कारक हैं। Tata Communications ग्लोबल नेटवर्क सर्विसेज में एक लीडर है, लेकिन AWS और Microsoft जैसे क्लाउड जायंट्स से कड़े मुकाबले का सामना कर रही है। लगभग ₹43,000 करोड़ के मार्केट वैल्यूएशन के साथ, इसका पी/ई रेश्यो 25.6x और 39.5x के बीच रहा है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि यह वैल्यूएशन पीयर्स की तुलना में ज़्यादा है। निवेशकों का ध्यान अब प्रॉफिटेबिलिटी पर शिफ्ट हो गया है, खासकर जब यह सेक्टर हाई-वैल्यू डिजिटल सर्विसेज की ओर बढ़ रहा है।
प्रॉफिटेबिलिटी पर बढ़ा दबाव
Q4 FY26 में नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 74.7% की भारी गिरावट, पिछली तिमाहियों के 'इन-लाइन' नतीजों के विपरीत है और बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट के कारण प्रॉफिट मार्जिन पर गहरे दबाव का संकेत देती है। पिछले साल के एकमुश्त फायदों को छोड़ दें तो, अंदरूनी ऑपरेशनल परफॉर्मेंस कमजोर नज़र आती है। Tata Communications पर 4.68 का उच्च डेट-टू-इक्विटी रेश्यो है, जो अर्निंग्स में और गिरावट आने पर चिंता का विषय बन सकता है। Verizon Communications और Cap Gemini जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां बहुत कम पी/ई रेश्यो (लगभग 12.1x और 10.9x) पर ट्रेड करती हैं, जो बताता है कि Tata Communications अपनी वर्तमान कमाई के हिसाब से ओवरवैल्यूड हो सकती है। कोर पब्लिक क्लाउड मार्केट में इसकी पोजीशन भी हाइपरस्केलर्स की तुलना में कम प्रभावी है, जिससे इसके नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन इनका रखरखाव महंगा है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
Motilal Oswal ने ₹1,720 के प्राइस टारगेट के साथ 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखी है, जो लगभग 13% के पोटेंशियल अपसाइड का संकेत देता है। फर्म ने इस बात पर जोर दिया कि स्टॉक को उच्च वैल्यूएशन हासिल करने के लिए निरंतर रेवेन्यू ग्रोथ और, सबसे महत्वपूर्ण, उच्च प्रॉफिट मार्जिन की ज़रूरत है। यह सतर्क नज़रिया रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद देखी गई प्रॉफिट की चुनौतियों से मेल खाता है। हालांकि, अन्य एनालिस्ट्स ज़्यादा आशावादी हैं। नौ एनालिस्ट्स ने औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट ₹1,928.11 रहने का अनुमान लगाया है, जो 26% से अधिक की पोटेंशियल अपसाइड और 'Buy' की कंसेंसस रेटिंग को दर्शाता है। कंपनी ने FY26 के लिए ₹17.5 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड प्रस्तावित किया है, जो शेयरहोल्डर्स की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
