Systematix ने Q2 FY27 के लिए IT सेक्टर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि लार्ज-कैप IT कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ **-1.5%** से **2.0%** के बीच रह सकती है। डिमांड में कमी और AI के बढ़ते प्रभाव के कारण सेक्टर दबाव में है, हालांकि Tech Mahindra और Coforge को बेहतर पोजीशन में माना जा रहा है।
भारतीय IT सर्विस सेक्टर के लिए Q2 FY27 चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। डोमेस्टिक ब्रोकरेज हाउस Systematix ने अपनी रिपोर्ट में सेक्टर को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए कहा है कि लार्ज-कैप कंपनियों की ऑर्गेनिक रेवेन्यू ग्रोथ -1.5% से 2.0% के दायरे में रह सकती है। सीजनल रूप से मजबूत रहने वाली दूसरी तिमाही में भी इस बार रिकवरी के संकेत कमजोर हैं।
ग्रोथ पर क्यों है दबाव?
ब्रोकरेज का कहना है कि क्लाइंट्स अब नए और बड़े प्रोजेक्ट्स की जगह कॉस्ट कटिंग और वेंडर कंसोलिडेशन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। इसके अलावा, Artificial Intelligence (AI) के कारण कॉन्ट्रैक्ट प्राइसिंग में भी बदलाव आ रहा है। AI टूल्स से प्रोडक्टिविटी बढ़ने के कारण क्लाइंट्स कीमतों में कटौती की मांग कर रहे हैं, जिसे 'AI-led deflation' कहा जा रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों के लिए अपनी फीस बढ़ाना मुश्किल हो गया है।
प्रमुख कंपनियों के लिए आउटलुक
सिस्टमैटिक्स का मानना है कि सेक्टर की दिग्गज कंपनियों को अपने सालाना गाइडेंस में बदलाव करना पड़ सकता है। अनुमान है कि Infosys अपने गाइडेंस के ऊपरी दायरे को घटाकर 2.5% तक ला सकती है, जबकि HCLTech का ग्रोथ आउटलुक 1.5% से 3.5% के बीच रह सकता है। वहीं, Wipro के लिए तिमाही काफी कठिन रहने वाली है, जिसकी ग्रोथ -2% से 0% के बीच रहने का अनुमान है।
मुश्किल दौर में कौन से शेयर चमकेंगे?
हालांकि ग्रोथ की रफ्तार धीमी है, लेकिन IT स्टॉक्स की वैल्यूएशन अपने मल्टी-ईयर लो पर है और 10 साल के एवरेज के मुकाबले काफी डिस्काउंट पर मिल रही है। इस माहौल में Systematix ने Tech Mahindra और Coforge को अपनी टॉप पिक बताया है। ये कंपनियां AI-लेड सर्विस ऑफरिंग्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के विस्तार पर फोकस कर रही हैं, जिससे वे मौजूदा बदलाव के लिए बेहतर तैयार हैं।
क्या है निवेशकों के लिए रिस्क?
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। क्लाइंट बजट में कमी और स्लो डिसीजन-मेकिंग के अलावा, मार्जिन पर विदेशी मुद्रा (FX) के उतार-चढ़ाव का असर पड़ सकता है। अर्निंग सीजन के दौरान मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखें, खास तौर पर इस बात पर कि कंपनियां मार्जिन कैसे मेंटेन करती हैं और AI का प्राइसिंग पर कितना गहरा असर पड़ रहा है।
