Carnelian Capital के विकास खेमानी का मानना है कि सेक्टर-दर-सेक्टर तुलना करने पर स्मॉल-कैप स्टॉक्स लार्ज-कैप से बेहतर वैल्यू दे रहे हैं। स्मॉल-कैप में **26.6%** की सालाना प्रॉफिट ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन निवेश से पहले लिक्विडिटी के जोखिम को समझना भी जरूरी है।
स्मॉल-कैप और लार्ज-कैप शेयरों के बीच वैल्यूएशन की बहस एक नया मोड़ ले चुकी है। Carnelian Capital के विकास खेमानी के अनुसार, आमतौर पर हम जो वैल्युएशन मल्टीपल्स देखते हैं, वे पूरी तस्वीर नहीं दिखाते। लार्ज-कैप इंडेक्स ऊपर से सस्ते दिखते हैं क्योंकि उनमें फाइनेंशियल सर्विसेज, ग्लोबल कमोडिटी और IT कंपनियों का बोलबाला है, जिनका वैल्युएशन स्वभाव से कम रहता है।\n\nजब हम घरेलू और नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों की तुलना करते हैं, तो स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। लार्ज-कैप स्पेस में ऐसी कंपनियां 42 के पीई (PE) पर ट्रेड कर रही हैं, जबकि स्मॉल-कैप सेगमेंट में ऐसी ही कंपनियां 30 के पीई पर मौजूद हैं। यह साफ इशारा करता है कि घरेलू ग्रोथ में हिस्सेदारी के लिए स्मॉल-कैप बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।\n\n### मुनाफे की रफ्तार और सेक्टर का अंतर\n\nफाइनेंशियल ईयर 2026 से 2028 के लिए अनुमान बताते हैं कि स्मॉल-कैप की प्रॉफिट ग्रोथ 26.6% सालाना हो सकती है, जो लार्ज-कैप की 18.7% की तुलना में कहीं ज्यादा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट हेल्थकेयर जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर काफी हद तक स्मॉल और मिड-कैप में ही केंद्रित हैं। साल 2020 से 2026 के बीच इन सेक्टर्स ने 33% की मीडियन एनुअल प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज की है।\n\n### जोखिमों को अनदेखा न करें\n\nग्रोथ की संभावनाएं आकर्षक हैं, लेकिन स्मॉल-कैप में जोखिम भी कम नहीं हैं। अप्रैल 2023 के बाद से बाजार में प्रदर्शन काफी असमान रहा है। लिक्विडिटी का मुद्दा सबसे बड़ा है; बाजार में गिरावट के वक्त इन शेयरों को बेचना मुश्किल हो जाता है। Zerodha के नितिन कामत ने भी आगाह किया है कि मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का एक बड़ा हिस्सा स्मॉल-कैप में है, जिससे गिरावट के समय पैनिक सेलिंग का खतरा बना रहता है।\n\nस्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड्स में ₹55,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश हो चुका है, लेकिन निवेशकों को कंपनी के मैनेजमेंट, कैपिटल डिसिप्लिन और बढ़ते इनपुट कॉस्ट जैसे फैक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए।
