ICICI Prudential AMC ने निवेशकों को अलर्ट किया है। स्मॉल-कैप स्टॉक्स के बढ़ते वैल्यूएशन (P/E 31.6x) को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि पोर्टफोलियो में इनका हिस्सा **30-35%** से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
पोर्टफोलियो में रिस्क का गणित
अगस्त 2026 तक Nifty Smallcap 100 इंडेक्स का P/E रेश्यो 31.6x पर पहुंच गया है, जबकि Nifty 50 का P/E 20x के आसपास है। इसका मतलब है कि स्मॉल-कैप स्टॉक्स अब काफी महंगे हो चुके हैं। अगस्त महीने में ही इन फंड्स में ₹14,900 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया है, जो निवेशकों की इनमें बढ़ती दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन यही वह जगह है जहां रिस्क बढ़ जाता है।
पोर्टफोलियो ड्रिफ्ट (Portfolio Drift) से कैसे बचें?
अक्सर निवेशक SIP शुरू करके उसे भूल जाते हैं, लेकिन बाजार की तेजी में स्मॉल-कैप स्टॉक्स की वैल्यू अपने आप पोर्टफोलियो में बढ़ जाती है। इसे 'पोर्टफोलियो ड्रिफ्ट' कहते हैं। जब बाजार में गिरावट आती है, तो ये छोटे स्टॉक्स लार्ज-कैप के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से गिरते हैं।
क्या है 30-35% का नियम?
ICICI Prudential AMC के प्रिंसिपल (इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी) चिंतन हरिया के मुताबिक, निवेशकों को अपने पूरे पोर्टफोलियो में मिड-कैप और स्मॉल-कैप के कुल वेटेज पर नजर रखनी चाहिए। इसे 30-35% की सीमा से ऊपर नहीं जाने देना चाहिए। अगर आपके पोर्टफोलियो में इन फंड्स का हिस्सा इस सीमा से ज्यादा हो गया है, तो यह समय मुनाफावसूली करने और पोर्टफोलियो को फिर से रीबैलेंस करने का है।
लंबी अवधि के लिए बैलेंस जरूरी
अपने पोर्टफोलियो का 60-70% हिस्सा लार्ज-कैप, डेट फंड्स या अन्य स्टेबल एसेट्स में रखें। यह रणनीति बाजार के खराब दौर में आपके निवेश को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी। लक्ष्य SIP बंद करना नहीं, बल्कि अपने रिस्क-रिवॉर्ड को उस लेवल पर रखना है जो आपकी वित्तीय जरूरतों और रिस्क लेने की क्षमता के अनुकूल हो।
