ICICI Securities का अनुमान है कि स्मॉल-कैप कंपनियां **30%** की दर से कमाई करेंगी, जो लार्ज-कैप की **15-16%** की अनुमानित ग्रोथ से कहीं ज्यादा है। घरेलू निवेश का फ्लो बढ़ने से यह तेजी आई है, लेकिन ऊंचे वैल्युएशन पर एक्सपर्ट्स ने सतर्क रहने की सलाह दी है।
भारतीय इक्विटी मार्केट में इस समय स्मॉल-कैप शेयरों का जलवा है। ICICI Securities की ताजा एनालिसिस के मुताबिक, स्मॉल-कैप कंपनियां 30% तक अर्निंग्स एक्सपेंशन दिखा सकती हैं। यह उछाल मुख्य रूप से निवेश के बदलते पैटर्न के कारण है, जहां अब 58% कैपिटल मिड और स्मॉल-कैप में जा रहा है, जो पहले के 40% के औसत से काफी ज्यादा है।
बैंकिंग सेक्टर में क्या है हाल?
बैंकिंग स्पेस में ग्रोथ की रफ्तार अलग-अलग है। Kotak Mahindra Bank को टियर-1 स्पेस में प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि यहां एडवांसेज में 25% की ग्रोथ देखी गई है। वहीं, HDFC Bank अभी भी सिस्टम एवरेज से धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। जानकारों का मानना है कि HDFC Bank में दमदार रिकवरी के लिए ऑपरेशनल ग्रोथ में तेजी लाना जरूरी है।
NBFCs और कंजम्पशन थीम पर दांव
गोल्ड लोन सेक्टर में 40% तक ग्रोथ की उम्मीद है, जिससे Muthoot Finance और Capri Global को फायदा मिल सकता है। त्योहारों के नजदीक आने के साथ ही प्रीमियम कंजम्पशन थीम भी फोकस में है। Phoenix Mills और Mahindra and Mahindra जैसी कंपनियां हाई-एंड कंज्यूमर डिमांड का फायदा उठा सकती हैं, जो महंगाई के दौर में भी मजबूत बने हुए हैं।
हेल्थकेयर और मार्केट रिस्क
हेल्थकेयर सेक्टर, विशेषकर डायलिसिस जैसी सेवाओं के लिए Nephroplus जैसे प्लेयर्स का भविष्य उज्ज्वल है। हालांकि, कैपेसिटी बढ़ाने के चक्कर में शॉर्ट टर्म में मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। ICICI Prudential AMC ने भी चेतावनी दी है कि मिड और स्मॉल-कैप का वैल्युएशन बहुत ज्यादा है। ऐसे में अगर कंपनियां उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करती हैं, तो गिरावट का रिस्क बना रहेगा। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें और इंटरनेशनल इंटरेस्ट रेट्स भी निवेश के लिहाज से अहम ट्रिगर बने रहेंगे।
