प्रभुकुंज लिलाधर (Prabhudas Lilladher) ने Siemens पर 'होल्ड' (Hold) रेटिंग बरकरार रखी है और शेयर के लिए ₹3,831 का टारगेट प्राइस सेट किया है। कंपनी के रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ दिख रही है, लेकिन लागत बढ़ने और वर्किंग कैपिटल पर दबाव के कारण कोर प्रॉफिट पर असर पड़ा है।
मार्जिन पर दबाव, फिर भी मजबूती
प्रभुकुंज लिलाधर (Prabhudas Lilladher) ब्रोकरेज फर्म ने Siemens पर अपनी 'होल्ड' (Hold) रेटिंग को बरकरार रखा है, साथ ही शेयर के लिए ₹3,831 का नया टारगेट प्राइस तय किया है। यह अपडेट ऐसे समय में आया है जब कंपनी अपने इंडस्ट्रियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग के बावजूद चुनौतीपूर्ण लागत माहौल से जूझ रही है। 12 अगस्त 2026 को शेयर लगभग ₹4,012 पर ट्रेड कर रहा था।
क्यों घटे कोर प्रॉफिट?
कंपनी के Q1 FY27 के नतीजों से पता चलता है कि रेवेन्यू ग्रोथ और कोर प्रॉफिट के बीच एक बड़ा अंतर है। ऑपरेशन से रेवेन्यू 15% बढ़कर ₹4,714 करोड़ हो गया, जो कि मांग में स्वस्थ वृद्धि का संकेत देता है। हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव साफ दिखा, जो 340 बेसिस पॉइंट्स घटकर 9.15% रह गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹2,143 करोड़ रहा, लेकिन इसमें से ₹2,099 करोड़ का बड़ा हिस्सा लो वोल्टेज मोटर्स (LVM) बिजनेस की बिक्री से हुआ एकमुश्त लाभ (one-time gain) था। इस एकमुश्त सौदे को हटा दें तो, कोर नेट प्रॉफिट करीब 19% घटकर ₹343 करोड़ रह गया। यह गिरावट कमोडिटी की कीमतों में महंगाई और फॉरेन एक्सचेंज की अस्थिरता का नतीजा है।
ऑर्डर बुक में तेजी, पर जोखिम बरकरार
मुनाफे की चुनौतियों के बावजूद, Siemens के नए बिजनेस में तेजी जारी है। कंपनी के ऑर्डर इनफ्लो में 16.5% की बढ़ोतरी हुई है, जो ₹6,328 करोड़ तक पहुंच गया है। यह ऑर्डर बुक स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इंडस्ट्रीज जैसे सेगमेंट्स में भविष्य के रेवेन्यू की अच्छी उम्मीद जगाती है। हालांकि, निवेशकों के लिए ऑपरेशनल हकीकत में कच्चे माल की बढ़ती लागत और वर्किंग कैपिटल की बढ़ती जरूरतें शामिल हैं। कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल, जो उसके कैश और इन्वेंट्री को मैनेज करने की कुशलता को मापता है, 47.5 दिनों से बढ़कर 71.3 दिन हो गया है। अगर इसे कुशलता से मैनेज नहीं किया गया, तो यह कैश फ्लो पर दबाव डाल सकता है।
वैल्यूएशन और आगे क्या देखें?
शेयर वर्तमान में महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 95.1 है और यह अपनी बुक वैल्यू के 10.3 गुना पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज फर्म इन वैल्यूएशन स्तरों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं, खासकर तब जब कंपनी लागत से संबंधित मार्जिन दबाव से निपट रही है। Siemens को ट्रैक करने वाले निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या कंपनी आने वाली तिमाहियों में अपने कोर मार्जिन में सुधार कर पाती है। मुख्य बात यह होगी कि कंपनी अपनी मजबूत ऑर्डर बुक को लाभदायक ग्रोथ में बदलने में कितनी कामयाब होती है, साथ ही बढ़ते वर्किंग कैपिटल साइकिल को मैनेज करती है और इनपुट लागतों पर नियंत्रण बनाए रखती है।
