संवत 2083 की शुरुआत के साथ ही **8 नवंबर, 2026** को होने वाली मुहूर्त ट्रेडिंग के लिए ब्रोकरेज फर्मों ने अपनी पसंद के शेयरों की लिस्ट जारी कर दी है। डिफेंस, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर दांव लगाने की सलाह दी गई है, हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगाई जैसे जोखिम भी बने हुए हैं।
जैसे-जैसे भारतीय शेयर बाजार संवत 2083 में प्रवेश कर रहा है, निवेश जगत में हलचल तेज हो गई है। 8 नवंबर, 2026 को होने वाली मुहूर्त ट्रेडिंग को देखते हुए InCred Equities, Kotak Neo और HDFC Securities जैसे प्रमुख ब्रोकरेज हाउस ने अपना सालाना आउटलुक साझा किया है। इन फर्मों ने उन कंपनियों पर फोकस किया है जिनकी अर्निंग विजिबिलिटी साफ है और जिनके पास मजबूत ऑर्डर बुक है।
सेक्टर का हाल और ब्रोकरेज का फोकस
नए संवत वर्ष के लिए ब्रोकरेज का रुझान घरेलू खपत वाले सेक्टर्स की ओर है। BFSI, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। जानकारों का मानना है कि सरकारी खर्च बढ़ने से इन क्षेत्रों की कंपनियों को बड़ा फायदा होगा। इन रिपोर्ट्स में कुछ शेयरों में 70% से ज्यादा तक के रिटर्न की उम्मीद जताई गई है, हालांकि ये लक्ष्य ब्रोकरेज के अपने मॉडल और अनुमानों पर आधारित हैं।
क्या हैं बड़े रिस्क?
निवेशकों को यह समझना होगा कि ये सिफारिशें भविष्य के अनुमान हैं, गारंटी नहीं। बाजार की मौजूदा चाल को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं:
- FIIs की बिकवाली: विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना बाजार की लिक्विडिटी के लिए चुनौती बना हुआ है।
- मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताएं: कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और RBI की ब्याज दरों पर रणनीति अनिश्चितता पैदा कर सकती है।
- मिड-कैप जोखिम: जिन छोटी कंपनियों में ज्यादा रिटर्न की संभावना जताई गई है, उनमें वॉल्यूम कम होने के कारण भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
सिर्फ ब्रोकरेज टारगेट के पीछे भागने के बजाय, कंपनी के फंडामेंटल पर नजर रखें। इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के ऑर्डर बुक का काम, कच्चे माल की लागत के बीच प्रॉफिट मार्जिन और बैंकों की एसेट क्वालिटी पर गौर करना बहुत जरूरी है। तिमाही नतीजों और मैनेजमेंट की कमेंट्री से ही यह स्पष्ट होगा कि क्या कंपनियां उन ऊंचे लक्ष्यों को हासिल कर पाएंगी या नहीं।
