Samvat 2083 की शुरुआत के साथ भारतीय ब्रोकरेज हाउसेस ने निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। Nifty50 में पिछले साल **12%** की गिरावट के बाद, Motilal Oswal जैसी दिग्गज कंपनियां अब 'अंधाधुंध' खरीदारी के बजाय मजबूत अर्निंग्स विजिबिलिटी वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने को कह रही हैं।
संवत 2083 की संभलती शुरुआत
संवत 2082 में Nifty50 इंडेक्स में लगभग 12% की गिरावट देखने को मिली थी, जिसने बाजार के मूड को बदल दिया है। अब निवेशक आक्रामक ग्रोथ के बजाय क्वालिटी और स्थिरता को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार पर अभी भी मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव हावी है। पिछले साल कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं और महंगाई ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखा है, जिससे कर्ज लेना महंगा बना हुआ है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच विदेशी निवेशकों (FII) ने बाजार से करीब $28 बिलियन की निकासी की है, जिसने ब्रोकरेज को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।
क्यों 'सिलेक्टिव' होना है जरूरी?
ब्रोकरेज हाउसेस का मानना है कि संवत 2083 में पैसा वही बनाएगा जो सही शेयर का चुनाव करेगा। Motilal Oswal ने रिसर्च में उन कंपनियों पर जोर दिया है जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है और जिनके मुनाफे में स्पष्टता है। बाजार में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े नाम जैसे Kotak Mahindra Bank और Adani Ports जैसे स्टॉक्स में 35% से 41% तक के रिटर्न की उम्मीद जताई जा रही है। अब फोकस BFSI, मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्पशन सेक्टर पर है, क्योंकि ये कंपनियां बढ़ती लागत के बावजूद अपना मार्जिन बचाने में सक्षम हैं।
किन रिस्क फैक्टर्स पर रखें नजर?
निवेशकों को अभी भी बाहरी झटकों के लिए तैयार रहना चाहिए। वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर एनर्जी कीमतों पर पड़ रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों का सपोर्ट बाजार को सहारा दे रहा है, लेकिन मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में अभी भी भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सलाह यही है कि केवल टारगेट प्राइस न देखें, बल्कि कंपनी के बैलेंस शीट और क्वार्टरली अर्निंग्स पर नजर रखें कि क्या वे अपनी लागत ग्राहकों पर डालने में कामयाब हो रही हैं या नहीं।
