SEBI ने एक्सपायरी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए नए नियम जारी किए हैं। 7 दिसंबर, 2026 से सेटलमेंट के लिए 30-मिनट का वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि क्लोजिंग के समय होने वाली भारी वोलेटिलिटी को कम किया जा सके।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के लिए एक नया फ्रेमवर्क पेश किया है। अब डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस की गणना अंतिम 30 मिनट की ट्रेडिंग के VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) के आधार पर की जाएगी। यह कदम मार्केट पार्टिसिपेंट्स के फीडबैक के बाद उठाया गया है, क्योंकि पुरानी व्यवस्था के कारण बाजार बंद होते समय कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था।
ट्रेडिंग मेकैनिज्म पर असर
पुराने तरीके से क्लोजिंग ऑक्शन में अचानक बड़ी हलचल (Sharp Price Swings) होती थी, जिससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेड करने वाले निवेशक घबराते थे। नई व्यवस्था से प्राइस डिस्कवरी प्रक्रिया अधिक स्थिर होगी। साथ ही, क्लोजिंग ऑक्शन का समय भी तय कर दिया गया है। अब यह सेशन रोजाना 3:30 PM से 3:40 PM के बीच 10 मिनट के लिए चलेगा। स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग 3:45 PM तक जारी रहेगी।
ब्रोकर्स के लिए मौका, एक्सचेंज के लिए चुनौती
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव ब्रोकरेज फर्मों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। जब ट्रेडिंग वॉल्यूम में कंसिस्टेंसी बनी रहती है, तो ब्रोकर्स की कमाई में सुधार की गुंजाइश बढ़ जाती है। दूसरी तरफ, एक्सचेंज ऑपरेटर्स के लिए स्थिति थोड़ी अलग है। हालांकि, मार्केट एक्टिविटी बढ़ने से उन्हें फायदा है, लेकिन ट्रेडिंग टर्नओवर बढ़ने का सीधा असर एक्सचेंज की कमाई पर हमेशा नहीं दिखता। अब देखना यह है कि क्या यह बदलाव पुराने ट्रेडर्स का भरोसा वापस ला पाएगा।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
दिसंबर में जब ये नियम लागू होंगे, तो ट्रेडर्स को यह ट्रैक करना होगा कि क्या क्लोजिंग के समय होने वाली प्राइस स्पाइक्स (Price Spikes) में वाकई कमी आई है। इसके साथ ही, वॉल्यूम डेटा पर नज़र रखना जरूरी होगा, क्योंकि इसी से पता चलेगा कि बाजार में पार्टिसिपेशन का स्तर क्या है।
