SEBI का बड़ा खुलासा: FY26 में 87.7% F&O ट्रेडर्स को हुआ नुकसान, ₹91,685 करोड़ का घाटा!

BROKERAGE-REPORTS
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI का बड़ा खुलासा: FY26 में 87.7% F&O ट्रेडर्स को हुआ नुकसान, ₹91,685 करोड़ का घाटा!

सेबी (SEBI) की एक नई रिपोर्ट ने शेयर बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) करने वाले खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की दुखती रग पर हाथ रखा है। साल 2025-26 (FY26) में, करीब **87.7%** यानी **88%** खुदरा निवेशकों ने इक्विटी डेरिवेटिव्स (Equity Derivatives) सेगमेंट में ट्रेडिंग से पैसा गंवाया है। कुल मिलाकर इन निवेशकों को **₹91,685 करोड़** का भारी घाटा हुआ है, जो ऑप्शन ट्रेडिंग के बड़े रिस्क और ट्रांजेक्शन कॉस्ट (Transaction Costs) के भारी बोझ को दर्शाता है।

क्या है सेबी की रिपोर्ट में?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अगस्त 2026 में जारी की गई एक विस्तृत स्टडी में खुदरा ट्रेडर्स के लिए इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट के नतीजों का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान, 87.7% खुदरा ट्रेडर्स को नेट लॉस (Net Loss) हुआ। हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष के ₹1.12 लाख करोड़ की तुलना में कुल नेट लॉस घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया। लेकिन, यह कमी ट्रेडर्स की संख्या में आई गिरावट के कारण है, न कि ट्रेडिंग के नतीजों में व्यापक सुधार के कारण।

क्यों हुआ इतना बड़ा घाटा?

रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में सक्रिय खुदरा ट्रेडर्स की संख्या लगभग 20% घटकर 78.6 लाख रह गई। वहीं, नए मार्केट पार्टिसिपेंट्स की संख्या में भी करीब 40% की कमी आई। इन सबके बावजूद, जो ट्रेडर्स मार्केट में बने रहे, उन पर वित्तीय बोझ काफी भारी रहा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुल नुकसान का 92% हिस्सा सिर्फ ऑप्शन ट्रेडिंग से हुआ।

युवाओं और कम आय वालों पर ज्यादा असर

स्टडी में यह भी सामने आया है कि खास सेगमेंट के ट्रेडर्स पर दबाव ज्यादा था। 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स, जो कुल खुदरा ट्रेडर्स का 43% थे, उन्हें 88.6% के लॉस रेट का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, ₹5 लाख से कम सालाना आय वाले व्यक्तियों ने कुल नुकसान का 53% हिस्सा वहन किया। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि युवा और कम आय वाले निवेशक डेरिवेटिव ट्रेडिंग के हाई-रिस्क (High-Risk) में कितने Vulnerable हैं।

छुपी हुई लागत और रणनीति की खामियां

मार्केट के उतार-चढ़ाव के अलावा, बार-बार ट्रेडिंग की छिपी हुई लागत पर भी स्टडी ने रोशनी डाली। खुदरा ट्रेडर्स ने पूरे वित्तीय वर्ष में लगभग ₹25,000 करोड़ ट्रांजेक्शन कॉस्ट के रूप में चुकाए। यह लागत, लीवरेज (Leverage) के रिस्क और शॉर्ट-ड्यूरेशन (Short-Duration) ट्रेडिंग स्ट्रेटेजीज़ के साथ मिलकर, अक्सर खुदरा ट्रेडर्स को बड़े कैपिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर वाले इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स (Institutional Traders) के मुकाबले नुकसान में डाल देती है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई ट्रेडर्स एक्सपायरी-डे ट्रेडिंग (Expiry-Day Trading) जैसी हाई-रिस्क स्ट्रेटेजी अपनाते हैं और बिना पर्याप्त रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) के लीवरेज का इस्तेमाल करते हैं। व्यवहार संबंधी पूर्वाग्रह (Behavioral Biases) जैसे नुकसान के बाद ओवरट्रेडिंग (Overtrading) करना या अत्यधिक जोखिम लेना, आखिर में खुदरा सेगमेंट के लिए एक नेगेटिव-सम आउटकम (Negative-Sum Outcome) की ओर ले जाता है। यह डेटा बताता है कि मुनाफा अभी भी मुख्य रूप से इंस्टीट्यूशनल और एल्गोरिथमिक ट्रेडर्स (Algorithmic Traders) के पक्ष में झुका हुआ है, जबकि खुदरा ट्रेडर्स लगातार रिटर्न जेनरेट करने में सिस्टमैटिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.