SBICAP Securities के MD और CEO बलदेव प्रकाश के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार अब लिक्विडिटी के दौर से निकलकर फंडामेंटल ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे केवल मार्केट ट्रेंड के बजाय सस्टेनेबल अर्निंग वाली कंपनियों पर ध्यान दें।
भारतीय शेयर बाजार अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक बाजार में तेजी की मुख्य वजह भारी लिक्विडिटी रही है, लेकिन अब यह दौर बदल रहा है। अब वही कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी, जिनका मुनाफा और अर्निंग ग्रोथ मजबूत है।
कमाई पर रखें नजर
SBICAP Securities के MD और CEO बलदेव प्रकाश का मानना है कि अब केवल बाजार के सेंटीमेंट पर निर्भर रहने का समय खत्म हो गया है। निवेशकों को ऐसी क्वालिटी कंपनियों को चुनना चाहिए जो सालाना 15% से 20% की दर से प्रॉफिट बढ़ा सकें।
किन सेक्टरों में है दम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, बैंकिंग, डिफेंस, पावर ट्रांसमिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में लंबी अवधि के लिए वेल्थ क्रिएशन की संभावना है। हालांकि, यहां भी कंपनी के बिजनेस मॉडल की मजबूती को परखना जरूरी होगा।
रिस्क और चुनौतियां
बाजार का आउटलुक सकारात्मक है, लेकिन कुछ रिस्क फैक्टर पर नजर रखना जरूरी है:
- क्रूड ऑयल: बढ़ती कीमतें महंगाई और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर दबाव डाल सकती हैं।
- जियोपॉलिटिकल तनाव: वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव ग्लोबल स्टेबिलिटी और एनर्जी की कीमतों के लिए बड़ा रिस्क है।
- मार्जिन दबाव: ऑयल मार्केटिंग, एग्रो-केमिकल्स और सीमेंट कंपनियों पर इनपुट कॉस्ट का दबाव है, जिससे उनका मुनाफा प्रभावित हो रहा है।
SIP बना सहारा
बाजार के लिए सबसे बड़ी राहत की बात SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए आ रहा रिटेल निवेश है। यह पैसा अब अधिक स्थिर और भरोसेमंद हो गया है, जो ग्लोबल बाजार में होने वाली उठा-पटक के खिलाफ एक 'बफर' (Buffer) का काम कर रहा है।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में सोने (Gold) और ग्लोबल इक्विटी को शामिल कर जोखिम कम करने की कोशिश करें, ताकि आने वाली तिमाही में कंपनियों के परफॉर्मेंस के आधार पर सही फैसले लिए जा सकें।
