SBI के शेयरों में आज यानी 10 अगस्त 2026 को करीब 1.9% की गिरावट देखी गई, भले ही ICICI सिक्योरिटीज ने ₹1,300 का नया टारगेट प्राइस दिया हो। निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग की, जबकि बैंक के नतीजों में 10% की बढ़ोतरी और एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला।
SBI के शेयर में आई गिरावट
10 अगस्त 2026 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयरों में लगभग 1.9% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब ICICI सिक्योरिटीज ने SBI के शेयर पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए अपना टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹1,300 कर दिया था। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट निवेशकों द्वारा प्रॉफिट बुकिंग का नतीजा है, क्योंकि हाल के दिनों में शेयर में अच्छी तेजी देखने को मिली थी।
दमदार नतीजे और बेहतर एसेट क्वालिटी
ICICI सिक्योरिटीज की सकारात्मक राय SBI के हालिया नतीजों पर आधारित है। बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में ₹21,121 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10.23% ज़्यादा है। इस शानदार मुनाफे का मुख्य कारण नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 14.88% की बढ़ोतरी रही, जो ₹46,992 करोड़ तक पहुंच गई। बैंक ने अपने डोमेस्टिक नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को 3.00% पर बनाए रखा।
इसके अलावा, बैंक की एसेट क्वालिटी में भी काफी सुधार देखा गया। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 1.47% और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) 0.38% पर आ गए। यह पिछले दो दशकों में बैंक के लिए सबसे कम बैड लोन का स्तर है।
भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटेजी
SBI अपनी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए कई रणनीतिक कदम उठा रहा है। बैंक एक खास कलेक्शन वर्टिकल (collection vertical) स्थापित कर रहा है, जिसका मकसद नॉन-सैलरीड कस्टमर सेगमेंट को बेहतर सेवा देना है। साथ ही, स्मॉल एंड मीडियम-एंटरप्राइज (SME) सेक्टर के लिए बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी इवैल्यूएशन (BRE) की लिमिट बढ़ाकर ₹100 मिलियन कर दी गई है। इन पहलों से बैंक अपने लोन पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने और मध्यम अवधि में अपनी ग्रोथ बनाए रखने की उम्मीद कर रहा है।
निवेशकों की चिंताएं
हालांकि, नतीजों और मैनेजमेंट की योजनाओं को विश्लेषकों ने सराहा है, लेकिन शेयर में हालिया गिरावट निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है। बढ़ती डिपॉजिट कॉस्ट (deposit costs) के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन में संभावित अस्थिरता जैसे सेक्टर-स्पेसिफिक रिस्क (sector-specific risks) को लेकर निवेशक चिंतित हो सकते हैं। इसके अलावा, आर्थिक बदलावों के बीच बैंक की एसेट क्वालिटी बनाए रखने की क्षमता और बैंकिंग सेक्टर का समग्र प्रदर्शन भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
