उम्मीदों का सहारा: भविष्य की स्टील कीमतों पर दांव
Motilal Oswal की तरफ से SAIL को 'BUY' रेटिंग मिलना एक बड़ा डेवलपमेंट है, जिसमें शेयर के लिए ₹175 का टारगेट प्राइस रखा गया है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले समय में स्टील की कीमतें बढ़ेंगी और मार्जिन का आउटलुक भी सुधरेगा। शेयर की हालिया गिरावट को भी ब्रोकरेज अपने फेवर में देख रहा है। यह टारगेट 7x EV/EBITDA मल्टीपल पर आधारित है, जो सितंबर 2027 के अनुमानों को ध्यान में रखकर तय किया गया है।
तिमाही नतीजों का सच: वॉल्यूम बढ़ा, पर मार्जिन घटा
हालांकि, यह बुलिश आउटलुक ऐसे समय में आया है जब SAIL के Q3 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का रेवेन्यू 12% बढ़कर ₹274 बिलियन रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले काफी अच्छा है। यह ग्रोथ मजबूत वॉल्यूम के दम पर हासिल हुई, हालांकि नेट सेलिंग रियलाइजेशन (NSR) कमजोर रहा। वहीं, अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्सेस, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन (EBITDA) 13% बढ़कर ₹22.9 बिलियन हुआ, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले यह 9% नीचे रहा। EBITDA पर टन का आंकड़ा, जो प्रॉफिटेबिलिटी का अहम पैमाना है, ₹4,455 रहा। यह पिछले साल की तुलना में 3% और पिछली तिमाही की तुलना में 14% कम था, जिसका मुख्य कारण कमजोर NSR और ऑपरेटिंग कॉस्ट का बढ़ना रहा।
कंपनी का एडजस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (APAT) तिमाही में ₹3.7 बिलियन रहा, जो पिछली तिमाही से 44% कम है। यह Q3 FY25 से भी कम है। इस प्रॉफिट में गिरावट की वजह 'अन्य आय' (other income) में कमी और डेप्रिसिएशन चार्जेस का बढ़ना बताई जा रही है। डेप्रिसिएशन ₹1,453.48 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹1,303.93 करोड़ से ज्यादा है।
वैल्यूएशन और पियर्स से तुलना
फरवरी 2026 की शुरुआत में, SAIL का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 21.4 से 26.02 के बीच था (TTM)। यह इसके बड़े कॉम्पिटिटर्स टाटा स्टील (लगभग 32-37.5 P/E) और JSW स्टील (लगभग 37.5-48 P/E) की तुलना में काफी कम है। यह वैल्यूएशन गैप बताता है कि SAIL शायद सस्ता दिख रहा है, पर इन्वेस्टर्स कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) को लेकर चिंतित हो सकते हैं, जो हाल ही में 4.84% था, जबकि इंडस्ट्री का औसत 10.09% है।
SAIL का मार्केट कैप फरवरी 2026 की शुरुआत में लगभग ₹65,000 करोड़ था। 4 फरवरी 2026 को शेयर का भाव करीब ₹157 था, जिसने पिछले 12 महीनों में लगभग 47.48% का रिटर्न दिया है, जो ब्रॉडर मार्केट से बेहतर है।
मार्जिन पर दबाव और इनपुट कॉस्ट का खेल
वॉल्यूम ग्रोथ के बावजूद, Q3 FY26 में SAIL के मार्जिन में भारी कमी आई। ऑपरेटिंग मार्जिन 233 बेसिस पॉइंट्स घटकर 9.47% और PAT मार्जिन 207 बेसिस पॉइंट्स घटकर 1.57% रह गया। इसकी वजह घरेलू स्टील की कीमतों में बड़ी गिरावट रही, जो इम्पोर्ट बढ़ने और एक्सपोर्ट डिमांड कमजोर होने से पांच साल के निचले स्तर ₹47,000 प्रति टन तक गिर गई थी। हाल ही में सेफगार्ड ड्यूटी और मजबूत डोमेस्टिक डिमांड से कीमतें सुधरी हैं, लेकिन कोकिंग कोल की बढ़ती कीमतों ( 10% ऊपर) से मार्जिन सुधारने की राह मुश्किल हो सकती है।
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि Q4 FY26 में EBITDA पर टन में सुधार होगा। वे फ्लैट्स और लॉन्ग्स की कीमतों में बढ़ोतरी और इन्वेंटरी लिक्विडेशन का फायदा उठाने की बात कह रहे हैं। हालांकि, कोकिंग कोल की बढ़ी लागत आने वाली तिमाहियों में EBITDA ग्रोथ को सीमित कर सकती है।
सेक्टर का भविष्य और पिछला प्रदर्शन
भारतीय स्टील सेक्टर में FY2025/2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन डिमांड के चलते लगभग 8% की ग्रोथ का अनुमान है। लेकिन, सप्लाई बढ़ने और स्टील की कीमतों में नरमी से ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। ICRA के एनालिस्ट्स का कहना है कि कैपेसिटी बढ़ाने की योजनाएं बैलेंस शीट पर बोझ डाल सकती हैं अगर प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार न हुआ।
ऐतिहासिक रूप से, SAIL के शेयर ने वॉल्यूम ग्रोथ की बातों पर अच्छा रिएक्शन दिखाया है, भले ही मार्जिन पर दबाव रहा हो। हालांकि, कंपनी की सेल्स ग्रोथ को सस्टेनेबल प्रॉफिट में बदलने की क्षमता पर सवाल बने हुए हैं। पिछले पांच साल का EBIT CAGR -0.19% रहा है। अगले 5-6 सालों में ₹1 ट्रिलियन से अधिक का कैपेक्स प्लान, अगर ठीक से मैनेज न हुआ तो, कर्ज घटने के हालिया ट्रेंड को उलट सकता है।
एनालिस्ट्स की राय
जहां Motilal Oswal का अपग्रेड स्टील की कीमतों के लिए बुलिश शॉर्ट-टर्म व्यू दिखाता है, वहीं कुछ एनालिस्ट्स अभी भी सतर्क हैं। IDBI कैपिटल और PL कैपिटल दोनों ने SAIL को 'होल्ड' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹151 रखा है। उनकी चिंताओं में नियर-टर्म मार्जिन प्रेशर और बढ़ते कैपेक्स व कर्ज का जोखिम शामिल है। एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय के अनुसार, शेयर में मौजूदा भाव से कुछ गिरावट की संभावना है, जिसका औसत टारगेट प्राइस लगभग ₹139.75 है। कंपनी की विस्तार योजनाओं को कुशलता से लागू करने और इनपुट कॉस्ट की अस्थिरता को मैनेज करने की क्षमता आने वाले समय में इसकी वैल्यूएशन और निवेशक सेंटीमेंट को तय करेगी।
