Motilal Oswal ने Relaxo Footwears पर अपनी 'Sell' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹290 तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी का वैल्यूएशन काफी महंगा है। जून तिमाही में कंपनी की 8% रेवेन्यू ग्रोथ असल में प्राइस हाइक का नतीजा थी, जबकि वॉल्यूम में 2% की गिरावट आई।
Motilal Oswal की 'Sell' रेटिंग बरकरार
Motilal Oswal ने Relaxo Footwears पर अपनी 'Sell' रिकमेंडेशन को फिर से दोहराया है और शेयर के लिए ₹290 का टारगेट प्राइस रखा है। 14 अगस्त 2026 तक, कंपनी का शेयर ₹398–₹401 के रेंज में कारोबार कर रहा था, जो ब्रोकरेज के सतर्क रुख को दर्शाता है।
वैल्यूएशन पर चिंता
ब्रोकरेज की मुख्य चिंता कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर है। Motilal Oswal ने बताया कि यह स्टॉक फिलहाल फाइनेंशियल ईयर 2028 के अनुमानित आय का लगभग 45 गुना पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज की राय में, कंपनी के हालिया ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और ग्रोथ मेट्रिक्स को देखते हुए यह वैल्यूएशन काफी महंगा है।
वॉल्यूम ग्रोथ में गिरावट बनी मुख्य चिंता
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजों में, Relaxo Footwears ने लगभग ₹705–₹718 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 8% अधिक था। हालांकि, इन आंकड़ों की गहराई से जांच करने पर पता चलता है कि यह ग्रोथ बढ़ी हुई मांग या बिक्री वॉल्यूम के कारण नहीं थी। बल्कि, रेवेन्यू में यह वृद्धि मुख्य रूप से उत्पाद की कीमतों में बढ़ोतरी का नतीजा थी।
तिमाही के दौरान, कंपनी के बिक्री वॉल्यूम में 2% की गिरावट आई। निवेशकों के लिए यह एक चुनौती पेश करता है, क्योंकि केवल मूल्य वृद्धि पर आधारित ग्रोथ तब तक टिकाऊ नहीं हो सकती जब तक कि यह अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में ग्राहकों की मांग को कम न कर दे। फुटवियर इंडस्ट्री वर्तमान में तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है, खासकर मास और मिड-मार्केट सेगमेंट में, जहां मूल्य निर्धारण की शक्ति उपभोक्ता की पसंद से सीमित हो सकती है।
ऑपरेशनल दबाव और भविष्य का अनुमान
कंपनी ने तिमाही के लिए 15.4% का EBITDA मार्जिन दर्ज किया, लेकिन इनपुट लागत में महंगाई का दबाव जारी है। मैनेजमेंट ने एक सतर्क रुख अपनाया है, यह बताते हुए कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और कच्चे माल की बढ़ती लागत भविष्य के संचालन को प्रभावित कर सकती है।
निवेशक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में वॉल्यूम-आधारित ग्रोथ पर अपना ध्यान वापस ला सकती है या नहीं। मुख्य चुनौती लागत को ग्राहकों तक पहुंचाने की आवश्यकता को बिक्री वॉल्यूम को नुकसान पहुंचाए बिना संतुलित करना है। भविष्य में कंपनी की अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी को बचाने की क्षमता और मैनेजमेंट की दक्षता में सुधार करके बढ़े हुए इनपुट लागतों के प्रभाव को कम करने की क्षमता पर नजर रहेगी।
