Quest Investment Managers के CIO Rakesh Vyas ने पोर्टफोलियो के लिए नई दिशा दिखाई है। उनका मानना है कि कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, टेलीकॉम और मिड-साइज लेंडर्स में लंबी अवधि के लिए काफी दम है।
ग्रोथ का नया आधार: कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी
Rakesh Vyas का मानना है कि अब समय कंज्यूमर स्टेपल्स से आगे बढ़ने का है। डिस्क्रिशनरी सेक्टर जैसे रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और ऑर्गेनाइज्ड फूड डिलीवरी में डिमांड काफी मजबूत है। बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम के कारण ये कंपनियां लगातार डबल-डिजिट की ग्रोथ दिखा सकती हैं, जबकि ट्रेडिशनल स्टेपल्स पर मार्केट सैचुरेशन का दबाव बढ़ रहा है।
टेलीकॉम: टैरिफ हाइक से बढ़ेगी मुनाफे की रफ्तार
टेलीकॉम सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही टैरिफ बढ़ाने में देरी हो रही है, लेकिन यह अनिवार्य है। टैरिफ में बढ़ोतरी से ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) में सुधार होगा और सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ेगी। Bharti Airtel जैसी कंपनियां अपनी मजबूत सब्सक्राइबर बेस और बेहतर एग्जीक्यूशन के दम पर इस माहौल में भी अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
बैंकिंग सेक्टर में मिड-कैप लेंडर्स का जलवा
फाइनेंशियल सेक्टर के लिए उनकी राय थोड़ी अलग है। Vyas के मुताबिक, मिड-साइज बैंकों में बड़ा अवसर है क्योंकि उनके पास रेपो-लिंक्ड और एक्सटर्नल बेंचमार्क-लिंक्ड लोन का पोर्टफोलियो अधिक है। बढ़ती ब्याज दरों के दौर में ये बैंक लार्ज प्राइवेट बैंकों के मुकाबले बेहतर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) का फायदा उठा सकते हैं।
जोखिम और सतर्कता
निवेशकों को कुछ मैक्रो हेडविंड्स पर नजर रखनी चाहिए:
- कच्चा तेल (Crude Oil): इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव महंगाई बढ़ा सकता है, जिससे मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
- पॉलिसी डिले: टेलीकॉम टैरिफ में देरी कंपनी के प्रॉफिट प्रोजेक्शन को प्रभावित कर सकती है।
- इंटरेस्ट रेट वोलाटिलिटी: डिपॉजिट कॉस्ट बढ़ने से बैंकों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
