रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने **7 अक्टूबर, 2026** को रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर इसे **5.5%** कर दिया है। सेंट्रल बैंक ने अपना रुख 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) में बदल दिया है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में हलचल है।
RBI का बड़ा फैसला
महंगाई को काबू में रखने और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव, खासकर वेस्ट एशिया के हालातों को देखते हुए RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। इसके साथ ही, सेंट्रल बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% रखा है।
बैंकों के लिए क्या हैं मायने?
ब्याज दरों में इजाफे का बैंकिंग सेक्टर पर मिला-जुला असर होता है। जिन बैंकों का पोर्टफोलियो फ्लोटिंग-रेट लोंस (floating-rate loans) पर आधारित है, उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में बढ़ोतरी की उम्मीद है क्योंकि बैंक लोन पर ब्याज दरें डिपॉजिट्स की तुलना में तेजी से बढ़ा सकते हैं।
किन शेयरों पर है एक्सपर्ट्स की नजर?
बाजार की शुरुआती उतार-चढ़ाव के बावजूद, टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने 5 बैंकों की पहचान की है जो मजबूती दिखा रहे हैं:
- Axis Bank
- Punjab National Bank (PNB)
- Karnataka Bank
- AU Small Finance Bank
- City Union Bank
ये लेंडर्स अपनी सपोर्ट लेवल को होल्ड करने की क्षमता के कारण फोकस में हैं।
रिस्क फैक्टर को न भूलें
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। लोन महंगे होने से EMI बढ़ जाएगी, जिससे हाउसिंग और ऑटो जैसे सेक्टर में लोन की मांग धीमी हो सकती है। साथ ही, अगर कर्ज ज्यादा महंगा हुआ, तो कुछ कर्जदारों की रीपेमेंट क्षमता पर दबाव आ सकता है, जिससे बैंकों की एसेट क्वालिटी पर असर पड़ने का खतरा बना रहेगा। 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' का मतलब है कि फिलहाल रेट कट की उम्मीद कम है, इसलिए बैंकों को अपनी फंडिंग कॉस्ट को बहुत ही सावधानी से मैनेज करना होगा।
