Quick commerce प्लेटफॉर्म्स जैसे Blinkit और Swiggy Instamart के लिए वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही शानदार रहने की उम्मीद है। कंपनियां अब भारी डिस्काउंट के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिससे प्रति ऑर्डर मार्जिन में सुधार दिख रहा है।
भारतीय क्विक कॉमर्स सेक्टर में बदलाव की नई लहर आई है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनियों ने आक्रामक डिस्काउंटिंग मॉडल को पीछे छोड़ते हुए सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल ग्रोथ की ओर रुख किया है। यह बदलाव इंडस्ट्री के लंबे समय से चले आ रहे 'कैश-बर्न' मॉडल को चुनौती दे रहा है।
प्रमुख खिलाड़ियों का प्रदर्शन
Zomato के मालिकाना हक वाली Blinkit इस समय मार्केट में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। अनुमान है कि कंपनी का नेट ऑर्डर वैल्यू 22.7% (QoQ) बढ़ सकता है, और डेली ऑर्डर वॉल्यूम 45 लाख के स्तर को छू सकते हैं। इसी तरह, Swiggy के Instamart की ग्रोथ 14.4% रहने का अनुमान है। दोनों कंपनियां अब 'डिलीवरी डेंसिटी' बढ़ाने पर जोर दे रही हैं, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट में कमी आ सके।
मुनाफे का नया गणित
अब कंपनियां डिस्काउंट के बजाय 'ऑपरेटिंग लेवरेज' (Operating Leverage) का उपयोग कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Swiggy के फूड डिलीवरी मार्जिन में सुधार देखा जा रहा है, जो कि प्रति ऑर्डर 7.8% तक पहुंचने की उम्मीद है।
चुनौतियां और जोखिम
निवेशकों को सतर्क रहने की भी जरूरत है। बाजार में Flipkart (Minutes) और Amazon जैसे ई-कॉमर्स दिग्गजों की कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है, जो मार्केट शेयर हथियाने के लिए अभी भी भारी छूट दे रहे हैं। इसके अलावा, मौजूदा ग्रोथ में एक बड़ा हिस्सा फेस्टिव सीजन की वजह से है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि त्यौहार खत्म होने के बाद क्या कंपनियां इसी तरह के ऑर्डर वॉल्यूम को बरकरार रख पाएंगी? मार्जिन को बचाने और कॉम्पिटिशन को मात देने की क्षमता ही इस सेक्टर के भविष्य को तय करेगी।
