भारत में Quick-Commerce कंपनियां अब अंधाधुंध डिस्काउंट के बजाय अपनी प्रॉफिटेबिलिटी पर जोर दे रही हैं। Zepto और Blinkit जैसी दिग्गज कंपनियां फ्री-डिलीवरी की लिमिट बढ़ा रही हैं और कैशबैक ऑफर्स को सीमित कर रही हैं, ताकि औसत ऑर्डर वैल्यू (AOV) और डिलीवरी की एफिशिएंसी को सुधारा जा सके।
भारत का क्विक-कॉमर्स सेक्टर अब एक मैच्योर फेज में प्रवेश कर रहा है, जहाँ अंधाधुंध ग्रोथ के बजाय अब कंपनी के मुनाफे और 'यूनिट इकोनॉमिक्स' पर ध्यान दिया जा रहा है। अब तक ये कंपनियां भारी डिस्काउंट और कम डिलीवरी फीस के जरिए कस्टमर्स जुटा रही थीं, लेकिन अब इनका मुख्य लक्ष्य लंबे समय तक टिके रहने वाले बिजनेस मॉडल पर फोकस करना है।
नई पॉलिसी का असर
ऑपरेशनल बदलावों की बात करें तो Zepto ने अपनी फ्री-डिलीवरी की सीमा को बढ़ाकर ₹199 कर दिया है। यही हाल Blinkit, Swiggy Instamart और BB Now का भी है। इतना ही नहीं, Amazon Now जैसी बड़ी कंपनियों ने कैशबैक इंसेंटिव के लिए मिनिमम स्पेंड की सीमा को 25% तक बढ़ा दिया है। इन कदमों का सीधा मकसद ऑर्डर वैल्यू बढ़ाना है ताकि तेजी से डिलीवरी करने वाली लॉजिस्टिक्स लागत को कवर किया जा सके।
डिस्काउंट में बड़ा बदलाव
डिस्काउंट की रणनीति अब काफी सधे हुए तरीके से लागू की जा रही है। ग्रोसरी पर औसत डिस्काउंट करीब 15% बना हुआ है, लेकिन इसमें कैटगरी के अनुसार अंतर है। पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर 29% तक की छूट दी जा रही है, जबकि डेयरी जैसे कम मार्जिन वाले आइटम्स पर यह केवल 3% के आसपास है।
क्या कस्टमर्स का भरोसा कायम रहेगा?
डेटा बताता है कि नए ऐप डाउनलोड्स की रफ्तार भले ही कम हुई हो, लेकिन पुराने ग्राहक अभी भी बने हुए हैं। Blinkit और Swiggy Instamart जैसे प्लेयर्स के लिए प्राइस वॉर का दौर अब शांत होता दिख रहा है। हालांकि, रिस्क बरकरार है—अगर फीस बहुत ज्यादा बढ़ी, तो ग्राहक वापस पारंपरिक रिटेल या ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर सकते हैं। इसके अलावा, Flipkart का 'Minutes' जैसे नए खिलाड़ियों का बाजार में आना मुकाबला अभी भी कड़ा बनाए हुए है।
