Prashasta Seth की boutique PMS स्ट्रैटेजी ने साल **2022** से ही Nifty 50 TRI को पछाड़ दिया है। हाई-ग्रोथ बिजनेस और लो-टर्नओवर पर केंद्रित इस मॉडल ने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है, हालांकि निवेशकों को इसके रिस्क प्रोफाइल को भी समझना चाहिए।
Prudent Investment Managers के फाउंडर और IIFL Asset Management के पूर्व लीडर Prashasta Seth की PMS स्ट्रैटेजी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। साल 2022 से अब तक यह पोर्टफोलियो लगातार Nifty 50 Total Return Index (TRI) के मुकाबले आगे रहा है। वर्तमान में यह फंड लगभग ₹1,250 करोड़ का AUM संभाल रहा है और इसका सालाना रिटर्न 16-17% के दायरे में है, जबकि इसी अवधि में ब्रॉड मार्केट इंडेक्स का रिटर्न 9-10% रहा है।
'टेम्परमेंट-फर्स्ट' फिलॉसफी पर जोर
इस फंड की निवेश रणनीति हाई-कनविक्शन और लो-टर्नओवर मॉडल पर आधारित है। यहां अक्सर शेयरों की अदला-बदली करने के बजाय 20 से 25 मजबूत कंपनियों को चुनकर कई वर्षों तक होल्ड करने पर जोर दिया जाता है। फंड मैनेजर का मानना है कि जब तक बिजनेस के फंडामेंटल्स और मैनेजमेंट की क्वालिटी बरकरार है, तब तक बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है।
मैनेजमेंट की स्थिरता पर बारीक नजर
इस स्ट्रैटेजी का मुख्य आधार 'मैनेजमेंट स्टेबिलिटी' है। Seth के मुताबिक, किसी भी कंपनी के टॉप मैनेजमेंट में बदलाव एक बड़ा रिस्क हो सकता है। वे उन कंपनियों को प्राथमिकता देते हैं जहां लीडरशिप टीम स्थिर है और लंबी अवधि की रणनीति पर काम कर रही है। पोर्टफोलियो में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर को एक मजबूत आधार माना गया है, जिसमें बड़े बैंकिंग संस्थानों के साथ-साथ माइक्रोफाइनेंस और लेंडिंग बिजनेस भी शामिल हैं। इसके अलावा, एविएशन जैसे सेक्टर में यह फंड इंडस्ट्री कंसोलिडेशन से फायदा उठाने वाली कंपनियों पर दांव लगाता है।
कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो के जोखिम
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि यह एक कंसंट्रेटेड (सीमित स्टॉक) पोर्टफोलियो है। म्यूचुअल फंड की तुलना में इसमें स्टॉक्स की संख्या कम होती है, जिससे पोर्टफोलियो की परफॉर्मेंस कुछ चुनिंदा होल्डिंग्स पर काफी निर्भर करती है। यदि एक या दो बड़े दांव गलत साबित होते हैं, तो इसका असर पूरे रिटर्न पर पड़ सकता है। जोखिम प्रबंधन के लिए फंड हाउस की एक खास नीति है—जब उन्हें क्वालिटी निवेश के मौके कम दिखते हैं, तो वे नया कैपिटल लेने से इनकार कर देते हैं, ताकि मौजूदा निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके।
