पिछले एक साल में **72%** की जोरदार तेजी के बाद, Pricol अब अपनीConnected Vehicle बिजनेस को अलग (Demerger) करने और **₹700 करोड़** के विस्तार की योजना पर काम कर रही है। हालांकि ग्रोथ के संकेत अच्छे हैं, लेकिन निवेशकों को मार्जिन और वैल्यूएशन के रिस्क को भी समझना होगा।
विस्तार और ग्रोथ की नई राह
Pricol के शेयर इन दिनों ₹770 के रिकॉर्ड हाई के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए ₹700 करोड़ का भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) कर रही है। यह निवेश मुख्य रूप से इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, पॉलीमर और कनेक्टेड सॉल्यूशंस की कैपेसिटी बढ़ाने के लिए है। कंपनी का लक्ष्य टू-व्हीलर सेगमेंट में बढ़ती डिमांड को भुनाना है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का रेवेन्यू ₹4,052 करोड़ रहा था, जिसमें DICVS यूनिट का बड़ा हिस्सा (61%) है।
डीमर्जर का मास्टर प्लान
ऑपरेशंस को आसान बनाने के लिए कंपनी अपनी DICVS यूनिट को अलग करके 'Pricol Autotech Limited' नाम से एक नई कंपनी बनाएगी। इस प्लान के तहत, मौजूदा शेयरहोल्डर्स को हर 1 शेयर के बदले नई कंपनी का 1 शेयर मिलेगा। इस बदलाव का मकसद ई-कॉकपिट और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी पर फोकस बढ़ाना है ताकि नए टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को आसानी से जोड़ा जा सके।
मार्जिन का दबाव और चुनौतियां
ग्रोथ की कहानी के साथ कुछ रिस्क भी जुड़े हैं। कच्चे माल (पॉलीमर और मेटल) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और चिप की महंगी कीमतों के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव है। इन बढ़ी हुई लागतों को ऑटो मैन्युफैक्चरर्स पर डालना चुनौतीपूर्ण होता है, जिससे रिकवरी में देरी हो रही है। साथ ही, 35x से 44x का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो यह बताता है कि मार्केट ने पहले से ही भविष्य की बड़ी उम्मीदें जोड़ रखी हैं।
निवेशकों के लिए काम की बात
आने वाले समय में निवेशकों को डीमर्जर की समय-सीमा और नई मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी के शुरू होने पर नजर रखनी चाहिए। यह भी देखना जरूरी होगा कि क्या कंपनी अपनी लागतों को ग्राहकों तक पहुंचाकर मार्जिन में सुधार कर पाती है या नहीं।
