ITC Share Price: ब्रोकरेज Prabhudas Lilladher ने बदला रुख, ITC के लिए जारी किया **₹294** का नया टारगेट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ITC Share Price: ब्रोकरेज Prabhudas Lilladher ने बदला रुख, ITC के लिए जारी किया **₹294** का नया टारगेट

Prabhudas Lilladher ने ITC के स्टॉक पर अपनी रेटिंग को अपग्रेड कर 'Accumulate' कर दिया है। कंपनी के Q2 FY27 नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने **₹294** का प्राइस टारगेट तय किया है। सिगरेट वॉल्यूम में **8%** की गिरावट के बावजूद FMCG सेगमेंट की रिकॉर्ड ग्रोथ से निवेशकों को सहारा मिल रहा है।

ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने ITC Limited के लिए अपनी रेटिंग को 'Hold' से बढ़ाकर 'Accumulate' कर दिया है और शेयर के लिए ₹294 का टारगेट प्राइस तय किया है। यह फैसला 2 नवंबर को जारी कंपनी के दूसरे तिमाही (Q2 FY27) के नतीजों के ठीक बाद आया है, जिसमें सिगरेट कारोबार के लिए चुनौतियां साफ दिखीं।

तिमाही नतीजों का गणित

कंपनी के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 20% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे मुख्य कारण सिगरेट पर टैक्स की दरें बढ़ना रहा, जिसका सीधा असर कंज्यूमर डिमांड पर पड़ा है। सिगरेट वॉल्यूम में सालाना आधार पर करीब 8% की कमी आई है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी द्वारा लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की क्षमता ने ऑपरेटिंग प्रॉफिट को और ज्यादा गिरने से बचा लिया है।

FMCG की दमदार रफ्तार

सिगरेट बिजनेस पर दबाव के बावजूद, कंपनी का नॉन-सिगरेट FMCG सेगमेंट एक चमकता हुआ सितारा बनकर उभरा है। फूड, पर्सनल केयर और स्टेशनरी प्रोडक्ट्स वाले इस बिजनेस ने पिछले 14 क्वार्टर्स में अपनी सबसे तेज रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। यह उन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए संकेत है जो कंपनी के तंबाकू पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को देख रहे हैं।

रिस्क और रिवॉर्ड

साल 2026 में ITC के शेयर में करीब 26% की गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में 'Accumulate' रेटिंग से संकेत मिलता है कि अब डाउनसाइड रिस्क सीमित है। निवेशकों के लिए 5% से 5.4% तक की डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) एक मजबूत बफर का काम कर रही है।

अभी भी चुनौतियां बरकरार

निवेशकों को कुछ जोखिमों के प्रति सावधान रहने की जरूरत है:

  • FIIs की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 9 तिमाहियों के निचले स्तर पर पहुंचा दी है, जो शेयर के लिए बड़ी रुकावट है।
  • टैक्स अनिश्चितता: सिगरेट पर भविष्य में टैक्स बदलने की संभावना मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
  • महंगाई का असर: पेपर और FMCG सेगमेंट में रॉ-मटेरियल की बढ़ती कीमतें ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित कर रही हैं, जिससे कंपनी पर सप्लाई चेन को टाइट रखने का दबाव है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.