Praj Industries पर ब्रोकरेज बुलिश: **₹353** का दिया टारगेट, जानें क्यों

BROKERAGE-REPORTS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Praj Industries पर ब्रोकरेज बुलिश: **₹353** का दिया टारगेट, जानें क्यों

ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Praj Industries पर अपना 'Buy' रेटिंग बरकरार रखा है और **₹353** का टारगेट प्राइस सेट किया है। हालांकि कंपनी ने FY28 और FY29 के लिए अनुमानों में कटौती की है, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट और डेटा सेंटर जैसे नए सेगमेंट्स में कंपनी की संभावनाएं अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। बता दें कि पिछले एक महीने में स्टॉक **21%** तक गिर चुका है और **₹241.70** के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

अर्निंग्स में कटौती के बावजूद भरोसा

ब्रोकरेज हाउस Prabhudas Lilladher ने भले ही फाइनेंशियल ईयर 2028 और 2029 के लिए कंपनी के अर्निंग्स पर शेयर (EPS) के अनुमानों को 14.7% और 7.8% तक कम किया हो, लेकिन स्टॉक के लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल को लेकर उनका नजरिया सकारात्मक बना हुआ है। हालिया गिरावट के बाद स्टॉक ₹241.70 (1 नवंबर, 2026 तक) पर आ गया है, जो एक महीने में 21% की सुस्ती दर्शाता है।

रेवेन्यू में दबाव की वजह

दूसरी तिमाही के कमजोर नतीजों और रेवेन्यू में महज 0.9% की सुस्त ग्रोथ के पीछे घरेलू 1G इथेनॉल मार्केट का बड़ा हाथ है। शुगर-बेस्ड इथेनॉल सेक्टर में डिमांड-सप्लाई का असंतुलन और कस्टमर्स की फंडिंग की दिक्कतें प्रोजेक्ट्स की रफ्तार को धीमा कर रही हैं।

क्या है कंपनी का मजबूत पक्ष?

  • नेट-डेट-फ्री: कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है और कैश रिजर्व काफी हेल्दी है।
  • बड़ा ऑर्डर बुक: कंपनी के पास ₹44.55 अरब का मजबूत ऑर्डर बैकलॉग है।
  • बेहतर मार्जिन: दूसरी तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन बढ़कर 6.18% हो गया है, जो पिछले साल इसी दौरान 3.81% था।

भविष्य की रणनीति

कंपनी ने अब घरेलू इथेनॉल पर निर्भरता कम करने के लिए इंटरनेशनल मार्केट का रुख किया है। ब्राजील, अर्जेंटीना और दक्षिण-पूर्व एशिया में कंपनी का ₹10 अरब का पाइपलाइन प्रोजेक्ट है। इसके अलावा, डेटा सेंटर के जरिए कंपनी को अगले साल ₹5 अरब से ₹6 अरब की कमाई की उम्मीद है। साथ ही, Bharat Petroleum के साथ मिलकर कॉम्प्रैस्ड बायोगैस और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल पर भी काम जारी है।

निवेशकों के लिए जोखिम

इन्वेस्टर्स को इस बात का ध्यान रखना होगा कि ऑर्डर बुक का एग्जीक्यूशन कितना तेजी से होता है। साथ ही, GenX जैसी नई टेक्नोलॉजी पर भारी खर्च मार्जिन में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होनी चाहिए कि नए सेगमेंट्स से रेवेन्यू आना कब शुरू होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.