ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Cera Sanitaryware पर अपना 'BUY' रेटिंग बरकरार रखा है और शेयर के लिए ₹7,221 का टारगेट प्राइस तय किया है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में **19.5%** की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन मार्जिन पर अस्थायी दबाव के कारण प्रॉफिट में गिरावट आई है।
ब्रोकरेज का भरोसा बरकरार
Q1 FY27 के नतीजों के बाद, Prabhudas Lilladher ने Cera Sanitaryware पर अपना 'BUY' रेटिंग बनाए रखा है और शेयर का टारगेट प्राइस ₹7,221 रखा है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी ने सेल्स में तो दमदार ग्रोथ दिखाई, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी पर कुछ短期 दबाव देखा गया।
कैसे रहे नतीजे?
Q1 FY27 में Cera Sanitaryware का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹486 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 19.5% ज्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट 2.6% घटकर ₹45.31 करोड़ रह गया। रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, मार्जिन पर दबाव के कारण प्रॉफिट में यह गिरावट आई।
प्रॉफिट पर दबाव की वजह?
कंपनी के मैनेजमेंट के मुताबिक, प्रॉफिट में यह कमी कुछ अस्थायी कारणों से हुई है। इनमें एकमुश्त वेज सेटलमेंट, कर्मचारी लाभ खर्चों में बढ़ोतरी और रॉ मटेरियल की बढ़ती लागत शामिल हैं, जिन्हें तुरंत प्राइस हाइक से कवर नहीं किया जा सका। अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए, कंपनी ने सेनेटरीवेयर सेगमेंट में 12% और फौसेटवेयर बिजनेस में 16% की बढ़ोतरी की है।
आगे क्या उम्मीद?
कंपनी को उम्मीद है कि बाकी के फाइनेंशियल ईयर में प्रदर्शन बेहतर रहेगा। मैनेजमेंट ने FY27 के लिए 18% से 20% तक रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगाया है। साथ ही, EBITDA मार्जिन (कंपनी की कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी का एक अहम पैमाना) के तीसरे क्वार्टर तक बढ़कर 13.5% से 14% के बीच पहुंचने की उम्मीद है, क्योंकि एकमुश्त खर्चे कम होंगे और प्राइस हाइक का असर दिखेगा।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि, ग्रोथ का आउटलुक पॉजिटिव दिख रहा है, लेकिन निवेशकों को कुछ संभावित जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। इकोनॉमी में किसी भी मंदी से डिमांड पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, Senator और Polypluz जैसे नए ब्रांड्स को मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में शामिल करने में कंपनी को एग्जीक्यूशन रिस्क का सामना करना पड़ सकता है। सप्लाई चेन में रुकावट या मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स में लेबर से जुड़ी समस्याएं भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।
निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनी आने वाले क्वार्टर्स में अपने प्रॉफिट मार्जिन को कितना बचा पाती है और क्या मार्केट नई कीमतों को बिना डिमांड पर ज्यादा असर डाले स्वीकार करता है।
