मुनाफे का इंजन गरजा, एसेट बिक्री से मिली ताकत
Piramal Finance ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (4QFY26) के लिए अपने नतीजे घोषित किए हैं, जिसमें ₹603 करोड़ का जबरदस्त प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया गया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले लगभग नौ गुना ज्यादा है। इस शानदार उछाल में खास गेन्स (Exceptional Gains) का बड़ा हाथ रहा, जिसमें Piramal Imaging की बिक्री से मिला ₹2.6 बिलियन का कंसीडरेशन और Shriram Life Insurance में अपनी हिस्सेदारी बेचने से हुई कमाई शामिल है। कंपनी ने लैंड डेवलपमेंट चार्जेज से जुड़े ₹5.9 बिलियन के राइट-ऑफ (Write-off) को भी बुक किया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंपनी का PAT बढ़कर ₹15 बिलियन हो गया, जो FY25 में ₹4.85 बिलियन था। कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया, जो पिछले साल की तुलना में 25% बढ़कर ₹1,01,230 करोड़ पर पहुंच गया। इसमें से 97% AUM 'ग्रोथ AUM' सेगमेंट का है। 4QFY26 में नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 41% बढ़कर ₹1,362 करोड़ रही और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 6.5% तक पहुंच गया। कंपनी ने FY26 के लिए ₹11 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है।
वैल्यूएशन प्रीमियम बनाम पियर्स का परफॉरमेंस
शानदार टॉप-लाइन नतीजों के बावजूद, Piramal Finance का वैल्यूएशन अपने इंडस्ट्री पियर्स की तुलना में काफी ज्यादा नजर आ रहा है। 28 अप्रैल 2026 तक, कंपनी का TTM P/E रेश्यो लगभग 40.99 था। यह HDFC Bank के 15.35-16.28, Bajaj Finance के 31.32-35.2 और Cholamandalam Investment and Finance Company के 26.9-27.59 जैसे प्रमुख NBFCs और बैंकों के P/E रेश्यो से काफी ऊपर है। वहीं, पूरी इंडस्ट्री का औसत P/E रेश्यो लगभग 19.51 है। इतना प्रीमियम वैल्यूएशन तब है जब कंपनी का TTM रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 0.94% से 2.82% के बीच रहा, जो Bajaj Finance के 18.46% और Cholamandalam के 19.72% से काफी कम है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन फिलहाल ₹42,000-₹45,000 करोड़ के आसपास है। अनुमान है कि भारतीय NBFC सेक्टर FY26 में 15-17% की दर से बढ़ेगा, जिसमें रिटेल लेंडिंग सेगमेंट सबसे आगे रहेगा।
प्रीमियम वैल्यूएशन के पीछे के जोखिम
Piramal Finance का शेयर फिलहाल बढ़े हुए मुनाफे के दम पर अच्छा कर रहा है, लेकिन गहराई से देखें तो कुछ छिपे हुए जोखिम भी नजर आते हैं। 4QFY26 में PAT में हुई भारी बढ़ोतरी मुख्य रूप से एसेट की बिक्री से मिले एकमुश्त फायदों (One-time Gains) के कारण है, न कि सिर्फ ऑर्गेनिक ऑपरेशंस के विस्तार की वजह से। ₹5.9 बिलियन के लैंड डेवलपमेंट चार्जेज का राइट-ऑफ पिछली एसेट मैनेजमेंट से जुड़ी चुनौतियों की ओर इशारा करता है, और भविष्य में ऐसे और राइट-ऑफ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कंपनी 2.58 के डेट/इक्विटी रेश्यो के साथ काम कर रही है, जो काफी ज्यादा लीवरेज (Leverage) दिखाता है। Whalesbook के एनालिस्ट्स ने भी नोट किया है कि कंपनी के वैल्यूएशन मल्टीपल्स, कम प्रॉफिटेबिलिटी मेट्रिक्स और हाई लीवरेज के मुकाबले स्ट्रेच्ड (Stretched) नजर आ रहे हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कंपनी ने ऐतिहासिक रूप से डिविडेंड नहीं दिया है, जो आय-केंद्रित निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। साथ ही, कंपनी का लो इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो भी एक कमजोरी का बिंदु है, खासकर बदलती ब्याज दर के माहौल में।
एनालिस्ट्स की राय और भविष्य की राह
Motilal Oswal Financial Services ने Piramal Finance पर 'BUY' रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹2,220 का टारगेट प्राइस दिया है। वे FY26-FY28 के लिए लगभग 24% का AUM CAGR और 56% का PAT CAGR देख रहे हैं, जिसमें FY28 तक RoA/RoE 2.6%/12% रहने का अनुमान है। Nomura ने भी ₹2,150 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी है। एनालिस्ट्स को रिटेल सेगमेंट में लगातार ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार की उम्मीद है, जो कम बॉरोइंग कॉस्ट से भी सपोर्टेड हो सकता है। कंपनी का स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन, जिसमें लीगेसी पोर्टफोलियो लगभग खत्म हो चुका है, इसे भविष्य में ग्रोथ के लिए तैयार करता है। हालांकि, निवेशकों को कमाई की स्थिरता और ऑपरेशनल परफॉरमेंस के मुकाबले वैल्यूएशन मल्टीपल्स के मैनेजमेंट पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
