Religare Broking की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के दूसरे हाफ यानी H2 2026 में फार्मा सेक्टर शानदार प्रदर्शन कर सकता है। इसकी वजह है एक्सपोर्ट डिमांड का स्थिर रहना और कंपनियों के पास मजबूत प्रोडक्ट पाइपलाइन। वहीं, बैंकिंग और डिफेंस जैसे सेक्टर में सोच-समझकर निवेश की सलाह दी गई है।फिलहाल, Nifty 50 इंडेक्स **23,600** के सपोर्ट लेवल के आसपास कंसॉलिडेट कर रहा है।
Detailed Coverage
बाजार में आई कंसॉलिडेशन की चाल
पिछले छह हफ्तों से भारतीय शेयर बाजार में एक कंसॉलिडेशन (Consolidation) का दौर चल रहा है। Nifty 50 इंडेक्स अपने निचले सपोर्ट लेवल को छू रहा है। जैसे-जैसे निवेशक साल 2026 के दूसरे हाफ की रणनीति बना रहे हैं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि उन सेक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए जो कमाई (Earnings) के मामले में मजबूत हैं और जिनका टेक्निकल चार्ट पैटर्न भी अच्छा है।
फार्मा सेक्टर की चमक
फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर को इस साल के बाकी बचे महीनों में आउटपरफॉर्म (Outperform) करने वाला माना जा रहा है। इसके पीछे चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ (Relative Strength) का सुधरना और फंडामेंटल सपोर्ट प्रमुख कारण हैं। एक्सपोर्ट डिमांड का स्थिर होना और इंटरनेशनल मार्केट्स में प्राइसिंग प्रेशर का कम होना कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। साथ ही, नए प्रोडक्ट्स का लॉन्च होना और डोमेस्टिक हेल्थकेयर की बढ़ती मांग इसे एक डिफेंसिव (Defensive) सेक्टर बनाती है, जो अनिश्चित बाजार में निवेशकों को सहारा दे सकता है।
बैंकिंग और डिफेंस: चाहिए खास रणनीति
भारतीय इक्विटी मार्केट का एक अहम हिस्सा, बैंकिंग सेक्टर, अब इंडिविजुअल बैंक के परफॉरमेंस पर निर्भर कर रहा है। 2026 की पहली छमाही के नतीजों को देखें तो ICICI Bank और Federal Bank जैसे बैंकों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन HDFC Bank और Axis Bank जैसी कंपनियों को प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ा है। ऐसे में, एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि निवेशकों को सेक्टर में सीधे पैसा लगाने के बजाय मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंकों पर फोकस करना चाहिए।
वहीं, सरकार के 'मेक इन इंडिया' और लगातार ऑर्डर मिलने के कारण डिफेंस सेक्टर में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। लेकिन, पिछले एक साल में Hindustan Aeronautics Limited (HAL), Bharat Forge, Data Patterns और Solar Industries जैसी कंपनियों के शेयर काफी चढ़ चुके हैं, जिससे इनका वैल्यूएशन (Valuation) काफी महंगा हो गया है। अब निवेशकों को सिर्फ ऑर्डर बुक वैल्यू पर नहीं, बल्कि कंपनियों की प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने की क्षमता पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि वैल्यूएशन रिस्क (Valuation Risk) बढ़ गया है।
IT और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का हाल
IT सेक्टर में रिकवरी दिख रही है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अभी ट्रेंड में स्थायी बदलाव का संकेत नहीं है। Nifty IT इंडेक्स को 29,800 के ऊपर लगातार मजबूती दिखानी होगी, जबकि 26,000 से 27,000 का लेवल एक अहम सपोर्ट जोन है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें इनके मार्जिन पर दबाव डालती हैं। इसलिए, इन कंपनियों पर पॉजिटिव आउटलुक के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का इंतजार करना होगा।
