PNC Infratech के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर है। हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बाद कंपनी अब फिर से सरकारी रोड टेंडर्स में हिस्सा ले सकेगी। हालांकि, दूसरी तिमाही में कंपनी का मुनाफा **12%** गिरा है, लेकिन ब्रोकरेज हाउस Prabhudas Lilladher ने स्टॉक पर अपना सकारात्मक नजरिया बरकरार रखा है।
कानूनी बाधा दूर, नई उम्मीदें
हाई कोर्ट से मिली राहत PNC Infratech के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब कंपनी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), सड़क परिवहन मंत्रालय और अन्य सरकारी निकायों के प्रोजेक्ट्स के लिए फिर से बोली लगा सकेगी। यह राहत कंपनी के फ्यूचर रेवेन्यू ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी थी।
नतीजों का हाल
कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस की बात करें तो, चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 12% गिरकर ₹0.73 बिलियन रहा है। रेवेन्यू उम्मीदों के मुताबिक रहा, लेकिन बढ़ते फाइनेंस खर्च, डेप्रिसिएशन और ऑपरेटिंग खर्चों ने मुनाफे पर दबाव बनाया।
आगे का रोडमैप (Management Outlook)
कंपनी ने अपने लक्ष्य को काफी ऊँचा रखा है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY27 तक रेवेन्यू ₹60 बिलियन और FY28 तक ₹75 बिलियन के स्तर पर पहुंच जाएगा। कंपनी ने ₹1,800 बिलियन का बड़ा प्रोजेक्ट पाइपलाइन तैयार किया है और अभी ₹166 बिलियन की वैल्यू वाले 17 प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की तैयारी है। इसके अलावा, कंपनी उज्बेकिस्तान, जॉर्जिया, कजाकिस्तान और UAE जैसे देशों में भी अपना विस्तार करने पर विचार कर रही है।
निवेशकों के लिए सलाह
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को कितने प्रभावी ढंग से ऑर्डर्स में बदल पाती है। भले ही कानूनी अड़चन दूर हो गई है, लेकिन कंस्ट्रक्शन सेक्टर में कर्ज और ऑपरेटिंग खर्चों को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
