PB Fintech के निवेशकों के लिए चिंता बढ़ गई है। सितंबर तिमाही के मिले-जुले नतीजों और रेगुलेटरी चिंताओं के चलते शेयर **₹930** के 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया है। कंपनी का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन विज्ञापन खर्च ने मार्जिन पर दबाव डाला है।
मुनाफे और मार्जिन का गणित
सितंबर तिमाही के दौरान कंपनी की रेवेन्यू में 35% और नेट प्रॉफिट में 43% की साल-दर-साल (YoY) ग्रोथ दर्ज की गई है। इसके साथ ही, इंश्योरेंस प्रीमियम में भी 38% का इजाफा देखने को मिला है। हालांकि, विज्ञापन और प्रमोशन पर हुए भारी-भरकम 59% खर्च ने कंपनी की कमाई की रफ्तार को थाम दिया है। इसका नतीजा यह रहा कि एडजस्टेड EBITDA करीब ₹220 करोड़ पर रहा, जो एनालिस्ट्स के अनुमानों से कम है और मार्जिन 10% के आसपास स्थिर बना हुआ है।
रेगुलेटरी दबाव की मार
स्टॉक में पिछले कुछ महीनों में 40% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। इसकी मुख्य वजह IRDAI का वो कंसल्टेशन पेपर है, जिसमें इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज के कमीशन पर कैप लगाने की बात कही गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स को डर है कि अगर रेगुलेटर इसे लागू करता है, तो कंपनी के रेवेन्यू मॉडल और 'PB Partners' जैसे बिजनेस सेगमेंट की वित्तीय सेहत पर सीधा असर पड़ेगा।
आगे की राह
ब्रोकरेज हाउसेज की राय फिलहाल बंटी हुई है। जहां कुछ एनालिस्ट्स कंपनी की मार्केट लीडरशिप पर भरोसा जता रहे हैं, वहीं कुछ ने FY2027 और FY2028 के लिए अनुमानों में कटौती की है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी विज्ञापन खर्च को कैसे नियंत्रित करती है और सरकारी रेगुलेशन के बाद अपना बिजनेस मॉडल कैसे बदलती है।
