Paytm के Q3 FY26 नतीजों पर एक नज़र
One 97 Communications (Paytm) ने इस तिमाही में ₹225 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹208 करोड़ के नुकसान के मुकाबले एक बड़ी वापसी है। कंपनी का रेवेन्यू 20.02% बढ़कर ₹2,194 करोड़ पर पहुंच गया। इसके पीछे मुख्य वजहें पेमेंट ग्रॉस मर्चेंडाइज वॉल्यूम (GMV) में 23% की सालाना वृद्धि और फाइनेंशियल सर्विसेज के वितरण में विस्तार रही। कंपनी ने ₹156 करोड़ का पॉजिटिव EBITDA भी दर्ज किया, जो 7% मार्जिन पर रहा। वहीं, कंज्यूमर UPI ट्रांजैक्शन में Paytm की मार्केट हिस्सेदारी बढ़कर 6.2% हो गई है।
फिनटेक सेक्टर में Paytm की पोजिशन
भारत का डिजिटल पेमेंट मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और इसके 2034 तक USD 33.5 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 16.1% रहने की उम्मीद है। UPI रिटेल डिजिटल पेमेंट्स में 80% से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है। हालांकि, Paytm इस ग्रोथ का फायदा उठा रहा है, लेकिन उसे PB Fintech और Pine Labs जैसे दिग्गजों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के शेयर का ट्रेलिंग बारह महीने का P/E रेश्यो अभी भी निगेटिव है, और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) इंडस्ट्री एवरेज से लगातार नीचे रहा है। Q2 FY25 तक, कंपनी के पास 4.2 करोड़ रजिस्टर्ड मर्चेंट बेस और 112 लाख पेमेंट डिवाइस थे।
ब्रोकरेज फर्म की राय और वैल्यूएशन
प्रमुख ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने One 97 Communications पर 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखी है और शेयर के लिए ₹1,275 का टारगेट प्राइस दिया है। यह वैल्यूएशन, 2030 के अनुमानित EBITDA के 22 गुना पर आधारित है, जिसे 2027 तक डिस्काउंट किया गया है। यह टारगेट प्राइस मौजूदा मार्केट प्राइस के आसपास ही है, जो लगभग ₹1,150-1,165 के दायरे में रहा है। 16 एनालिस्ट्स के कंसेंसस टारगेट की बात करें तो यह ₹1,399 है, जो ₹1,000 से ₹1,740 तक फैला हुआ है। हाल के दिनों में RBI की PIDF स्कीम के खत्म होने का असर कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ने की चिंता जताई गई है।
आगे क्या उम्मीद करें?
One 97 Communications के लिए अच्छी बात यह है कि वह हाई-ग्रोथ वाले फिनटेक सेक्टर में मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस और मार्केट एक्सपेंशन दिखा रही है। हालांकि, निगेटिव P/E रेश्यो, कॉम्पिटिशन और रेगुलेटरी बदलावों (जैसे PIDF स्कीम) का असर कंपनी की भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ सकता है। ब्रोकरेज फर्मों का 'Neutral' रुख बताता है कि मौजूदा स्टॉक प्राइस शायद कंपनी की संभावनाओं को फिलहाल दर्शा रहा है, और आगे चलकर सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी और मार्केट डायनामिक्स पर और स्पष्टता की ज़रूरत होगी।