OmniScience Capital के प्रेसिडेंट अश्विनी शमी ने न्यू-एज और मिड-कैप स्टॉक्स के बढ़ते वैल्यूएशन पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि शेयरों की कीमतें कंपनी की वास्तविक कमाई से काफी आगे निकल चुकी हैं, इसलिए निवेशकों को अब 'क्वालिटी ग्रोथ' पर फोकस करना चाहिए।
वैल्यूएशन में भारी अंतर
अश्विनी शमी का मानना है कि कई न्यू-एज कंपनियां ऐसे भाव पर ट्रेड कर रही हैं, जिसमें भविष्य की कई सालों की ग्रोथ को पहले ही जोड़ लिया गया है। अगर कंपनी के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते, तो निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आंकड़ों की बात करें तो Nifty Midcap 150 इंडेक्स का P/E रेशियो अभी करीब 27.43 पर चल रहा है, जबकि Nifty 100 इंडेक्स का वैल्यूएशन 20x के करीब है। इसका सीधा मतलब है कि मिड-कैप में ग्रोथ के लिए निवेशक बहुत महंगा प्रीमियम चुका रहे हैं।
किन सेक्टर्स में जोखिम ज्यादा?
OmniScience Capital ने साफ तौर पर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, प्राइवेट डिफेंस, टूरिज्म, रियल एस्टेट और FMCG जैसे सेक्टर्स को लेकर चेतावनी दी है। इन सेक्टर्स में शेयर प्राइसेस उस स्तर पर पहुंच गए हैं, जहां से रिटर्न की संभावना कम और जोखिम ज्यादा दिख रहा है।
बाजार पर बाहरी दबाव
सिर्फ वैल्यूएशन ही नहीं, बाजार के सामने कई और चुनौतियां भी हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव, महंगाई और करेंसी में गिरावट का दबाव बना हुआ है। इन हालातों के चलते Reserve Bank of India के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है, जिसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो सस्ती लिक्विडिटी के भरोसे ग्रोथ दिखा रही हैं।
क्या है निवेश की सही रणनीति?
OmniScience Capital अब 'साइंटिफिक इन्वेस्टिंग' (Scientific Investing) पर जोर दे रही है। इसके तहत उन कंपनियों को चुनने की सलाह दी जा रही है जो उचित भाव पर लगातार अच्छी ग्रोथ दिखा रही हैं। फिलहाल कैपिटल गुड्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर में सरकारी और प्राइवेट खर्च के दम पर बेहतर संभावनाएं नजर आ रही हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल तेजी के पीछे न भागें और देखें कि क्या कंपनी की कमाई इन बढ़े हुए वैल्यूएशन को सपोर्ट कर पा रही है या नहीं।
