Brent crude की कीमतें **3%** गिरकर **$110** के करीब आ गई हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने से फ्यूल-सेंसिटिव सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन सरकार द्वारा विंडफॉल टैक्स में किए गए बदलावों ने निवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी जटिल बना दी है।
कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों में सोमवार को बड़ी नरमी देखी गई। Brent crude वायदा लगभग 3% गिरकर $110 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। मिडिल ईस्ट से आ रहे सकारात्मक राजनयिक संकेतों के चलते सप्लाई बाधित होने का डर कम हुआ है, जो भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत की खबर है।
OMCs के लिए नफा-नुकसान का गणित
Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए कच्चे तेल के दाम कम होना रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार का संकेत होता है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। तेल की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट से 'इन्वेंट्री लॉस' का रिस्क भी बना रहता है, जहां रिफाइनरी के पास मौजूद पुराने महंगे स्टॉक की वैल्यू कम हो जाती है। इसके अलावा, 31 अक्टूबर, 2026 को फ्यूल एक्सपोर्ट पर बदले गए विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) ने मार्केट में रेगुलेटरी अनिश्चितता बढ़ा दी है, जो कच्चे तेल की गिरावट से मिलने वाले फायदों पर पानी फेर सकती है।
Aviation सेक्टर और IndiGo पर नजर
विमानन क्षेत्र में InterGlobe Aviation (IndiGo) चर्चा में है। Nomura ने स्टॉक पर अपना टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹6,200 कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि एयरलाइन ने लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की अपनी रणनीति को बखूबी निभाया है। अगर ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो यह एयरलाइंस के मुनाफे के लिए एक बड़ी राहत होगी।
हालांकि, सरकार द्वारा एक्सपोर्ट ड्यूटी में किए गए बदलाव और ATF पर बढ़ी हुई लेवी एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए एक बड़ी बाधा (Headwind) साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि ये कंपनियां इन टैक्स बदलावों को झेलते हुए कैसे अपना प्रदर्शन बरकरार रखती हैं।
