Nomura ने भारतीय स्टील सेक्टर पर अपना 'बुलिश' रुख बरकरार रखा है। घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों और सरकार के सुरक्षात्मक उपायों के चलते एनालिस्ट्स सेक्टर के भविष्य को लेकर आशावान हैं, हालांकि बढ़ती लागत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय स्टील सेक्टर में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ब्रोकरेज फर्म Nomura ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि घरेलू मांग और स्ट्रक्चरल ग्रोथ के चलते यह सेक्टर जून और जुलाई के मानसून महीनों में आई गिरावट से तेजी से उबर रहा है।
स्टील की कीमतों में रिकवरी
बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्टील की कीमतों में उछाल आया है। डोमेस्टिक रीबार (Rebar) की कीमतें अब करीब ₹53,900 प्रति टन तक पहुंच गई हैं। वहीं, हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतें ₹58,800 से ₹60,450 प्रति टन के दायरे में बनी हुई हैं। यह रिकवरी स्टील कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत है, जो साल की शुरुआत में दबाव का सामना कर रही थीं।
रॉ मटेरियल कॉस्ट का दबाव
कीमतें बढ़ने के बावजूद, स्टील कंपनियों के लिए कच्चा माल अभी भी महंगा साबित हो रहा है। 2026 में अब तक कोकिंग कोल (Coking Coal) की कीमतों में 25% का उछाल आया है। चूंकि भारत अपनी कुल जरूरत का 95% कोकिंग कोल आयात करता है, इसलिए यह तेजी सीधे प्रोडक्शन कॉस्ट पर असर डाल रही है। Nomura के मुताबिक, भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय साथियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि उन्होंने समय रहते कीमतों में बढ़ोतरी की है।
सरकारी सुरक्षा और रिस्क
स्टील सेक्टर के लिए सरकार की सेफगार्ड ड्यूटी (Safeguard Duties) एक मजबूत कवच की तरह काम कर रही है। फिलहाल यह ड्यूटी 11.5% है, जो 2028 तक घटकर 11% हो जाएगी। यह ड्यूटी सस्ते आयात को रोकने में मदद करती है। हालांकि, निवेशकों को जियो-पॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल सप्लाई चेन में होने वाली हलचल पर नजर रखनी चाहिए, जो कमोडिटी कीमतों में अचानक बदलाव ला सकती है। साथ ही, चीन से होने वाले सस्ते आयात पर भी निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
