अगस्त 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश का आंकड़ा **₹410 अरब** तक पहुंचने का अनुमान है। Nomura के मुताबिक, रिटेल निवेशकों का रुझान स्मॉल-कैप फंड्स की ओर है, जिसका सीधा फायदा Nippon AMC और HDFC AMC को मिल सकता है।
भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी एक नई ऊंचाई पर पहुंचती दिख रही है। अगस्त 2026 के लिए अनुमानित नेट इनफ्लो ₹410 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है, जो जुलाई के मुकाबले 36% की बड़ी बढ़त है। ब्रोकरेज फर्म Nomura की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस तेजी का सबसे ज्यादा फायदा Nippon AMC और HDFC AMC को मिलने के आसार हैं।
कौन सी कंपनी है आगे?
Nippon AMC का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। कंपनी की नए इनफ्लो में हिस्सेदारी 8.3% रहने का अनुमान है, जो उसके वर्तमान एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के मुकाबले काफी ज्यादा है। वहीं, HDFC AMC का शेयर 7.0% रहने की उम्मीद है। HDFC AMC की इस सुस्ती का मुख्य कारण उनके बैलेंस्ड एडवांटेज और एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स से निवेशकों की निकासी रही है, न कि उनके कोर इक्विटी बिजनेस में कोई गिरावट।
स्मॉल-कैप का क्रेज, लार्ज-कैप से दूरी
निवेशकों का पूरा ध्यान अभी स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स पर टिका है। स्मॉल-कैप फंड्स में अकेले ₹88 अरब का निवेश आने का अनुमान है। इसके उलट, लार्ज-कैप फंड्स ने निवेशकों को निराश किया है, जहाँ इस महीने करीब ₹10 अरब का आउटफ्लो (निकासी) दर्ज किया गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इतना सब कुछ सकारात्मक होने के बावजूद, सेक्टर में चुनौतियां भी कम नहीं हैं:
- हाई वैल्यूएशन: बाजार ऊंचे स्तर पर है, जिससे किसी भी छोटी गिरावट पर स्टॉक कीमतों में बड़ी हलचल हो सकती है।
- पैसिव फंड्स से मुकाबला: लो-कॉस्ट पैसिव प्रोडक्ट्स के बढ़ने से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की फीस पर दबाव बढ़ सकता है।
- रेगुलेटरी रिस्क: बाजार की अस्थिरता और बढ़ती टेक्नोलॉजी लागत सेक्टर के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रिटेल निवेशकों का यह भरोसा बना रहता है या बाजार में किसी बड़े बदलाव के साथ इनफ्लो की रफ्तार धीमी पड़ती है।
