ब्रोकरेज फर्म Nomura ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही को लेकर FMCG सेक्टर के लिए चेतावनी जारी की है। कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण मार्जिन पर दबाव दिख रहा है, लेकिन Marico, ITC और Tata Consumer Products जैसे शेयर इस दौर में मजबूती दिखा सकते हैं।
भारतीय कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के लिए वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। Nomura की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। कच्चे माल की कीमतें जिस रफ्तार से बढ़ रही हैं, कंपनियां उतनी तेजी से अपने उत्पादों के दाम नहीं बढ़ा पा रही हैं, जिससे उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है।
लागत बढ़ने की असली वजह
रिपोर्ट के अनुसार, पैकेजिंग की लागत मुनाफे के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। चूंकि पैकेजिंग की कीमतें काफी हद तक क्रूड ऑयल और प्लास्टिक डेरिवेटिव्स जैसे HDPE पर निर्भर करती हैं, इसलिए ग्लोबल बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से उत्पादन लागत बेकाबू हो रही है। चीनी जैसी कमोडिटीज में मामूली राहत जरूर है, लेकिन ईयर-ऑन-ईयर आधार पर कीमतें अभी भी काफी ऊंची हैं, जिसका दबाव Britannia, Nestle और Dabur जैसी दिग्गज कंपनियों पर दिख रहा है।
कंपनियों में है बड़ा अंतर
Nomura ने सभी कंपनियों को एक तराजू में नहीं तौला है। उन्होंने Marico, ITC और Tata Consumer Products को अपनी पसंदीदा लिस्ट में रखा है। Marico को कोपरा की कीमतों में नरमी का फायदा मिल सकता है, जिससे कंपनी को दाम बढ़ाए बिना लागत कम करने में मदद मिलेगी। इसके विपरीत, Hindustan Unilever (HUL) और Dabur पर ब्रोकरेज ने 'न्यूट्रल' रेटिंग दी है, क्योंकि उन्हें महंगाई से लड़ने की इन कंपनियों की क्षमता पर संदेह है।
ड्यूटी में कटौती का असर
सरकार ने क्रूड पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को घटाकर 5% कर दिया है, जिससे HUL और Godrej Consumer Products जैसी कंपनियों को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, ब्रोकरेज का मानना है कि यह केवल एक मामूली सहारा है और लागत का माहौल अभी भी काफी सख्त बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
आने वाले नतीजों के दौरान निवेशकों को कंपनियों की 'प्राइसिंग स्ट्रैटेजी' पर नजर रखनी चाहिए। कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए दाम बढ़ाती हैं या सप्लाई चेन में बदलाव करती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतों में कोई भी बड़ा उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर इन कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित करेगा। यह समझना बेहद जरूरी है कि क्या कंपनियां बिक्री घटाए बिना अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी या नहीं।
