Q2 के बेहतर नतीजों के बावजूद Nomura ने HPCL के टारगेट प्राइस को **₹420** से घटाकर **₹380** कर दिया है। ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि ऑयल कंपनियों के लिए शानदार मार्जिन का दौर अब खत्म हो रहा है।
मार्जिन पर बढ़ते दबाव की आहट
नोमुरा का मानना है कि पिछले कुछ समय से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को जो जबरदस्त मार्जिन मिल रहा था, वह अब सामान्य स्तर पर लौट रहा है। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, कंपनियां अभी ईंधन बिक्री पर लगभग ₹26 प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। क्रूड ऑयल की कीमतों में कमी न आना और रुपये की कमजोरी के कारण रिटेल ऑपरेशंस पर ₹3 से ₹4 प्रति लीटर का अतिरिक्त दबाव पड़ा है। साथ ही, मिडिल ईस्ट में चल रही भू-राजनीतिक अस्थिरता ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए बड़ा रिस्क बनी हुई है।
ऑपरेशंस और कर्ज प्रबंधन पर नजर
चुनौतियों के बावजूद HPCL अपनी इंटरनल एफिशिएंसी को सुधारने में जुटी है। कंपनी की 9 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली HRRL रिफाइनरी, जिसमें कंपनी की 74% हिस्सेदारी है, दिसंबर 2026 तक पूरी क्षमता से चलने की उम्मीद है। कंपनी ने रिफाइनेंसिंग के जरिए अपने कर्ज की लागत को 105 बेसिस पॉइंट्स कम किया है, जिससे वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही से सालाना ₹5 बिलियन की ब्याज बचत होने का अनुमान है।
विजाग रिफाइनरी के रेजिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी से फिलहाल $0.7 से $1 प्रति बैरल का फायदा मिल रहा है, जिसके मार्च 2027 तक बढ़कर $2 से $3 प्रति बैरल तक पहुँचने की उम्मीद है।
वैल्यूएशन का गणित
नोमुरा का विश्लेषण बताता है कि HPCL फिलहाल अपने फिस्कल ईयर 2028 के अनुमानित EV/EBITDA के 5.1 गुना पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि Indian Oil Corporation और Bharat Petroleum Corporation फिलहाल बेहतर विकल्प हैं और उन पर 'Buy' रेटिंग दी गई है। निवेशकों के लिए अब अहम यह होगा कि क्या कंपनी नए रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स के जरिए अपने मुनाफे को बचा पाती है या नहीं।
