ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे IOC और BPCL पर भरोसा जताया है। ब्रोकरेज का मानना है कि साल 2027 तक ग्लोबल ऑयल मार्केट में सरप्लस होने से इन कंपनियों के मुनाफे में लंबी अवधि तक बढ़त देखने को मिलेगी।
ऑयल सेक्टर में पिछले कुछ समय से छाई सुस्ती के बीच ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura ने निवेशकों के लिए एक सकारात्मक रिपोर्ट जारी की है। इस साल अगस्त 2026 तक प्रमुख सरकारी ऑयल कंपनियों के शेयरों में 15% से 25% तक की गिरावट आई है, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि लॉन्ग-टर्म में स्थिति मजबूत हो सकती है।
क्यों भरोसेमंद है यह सेक्टर?
Nomura की राय का आधार इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के आंकड़े हैं, जिनके मुताबिक 2027 तक ग्लोबल ऑयल सप्लाई में सरप्लस हो सकता है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतें सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल ये कंपनियां $8 से $13 प्रति बैरल का हेल्दी इंटीग्रेटेड मार्केटिंग मार्जिन कमा रही हैं, जो कि LPG सब्सिडी के बोझ के बावजूद स्थिर बना हुआ है।
Reliance Industries को मिला बड़ा फायदा
इस रिपोर्ट में Reliance Industries को अलग जगह दी गई है। कंपनी की रिफाइनिंग कैपेसिटी का 52% हिस्सा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) रिफाइनरी से आता है। इस स्ट्रक्चरल एडवांटेज के कारण रिलायंस पर घरेलू एक्साइज ड्यूटी का असर कम पड़ता है, जिससे वे ग्लोबल दबाव के बीच भी बेहतर मुनाफा कमाने में सक्षम हैं।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
हालांकि ब्रोकरेज बुलिश है, लेकिन वेस्ट एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे रूट पर खतरा बना हुआ है। अगस्त 2026 के अंत में ब्रेंट क्रूड $86 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। यदि तनाव बढ़ा तो क्रूड के भाव ऊपर जा सकते हैं, जिससे रिटेल फ्यूल कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।
इसके अलावा, निवेशकों को घरेलू नीति पर भी नजर रखनी होगी। यदि सरकार पेट्रोल-डीजल पर दी गई ₹10 प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी कटौती को वापस लेती है, तो ओएमसी की प्रॉफिटेबिलिटी पर सीधा असर पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स के दौरान कंपनियों के मार्जिन और सरकारी पॉलिसी के अपडेट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
