ब्रोकरेज फर्म Nomura ने Jindal Steel & Power को एक 'tactical investment opportunity' के तौर पर चुना है। डोमेस्टिक रीबार (rebar) की कीमतों में आई हालिया रिकवरी को इसका मुख्य कारण बताया गया है। वहीं, Tata Steel और JSW Steel पर 'Buy' रेटिंग को बरकरार रखा गया है।
Jindal Steel क्यों बनी Nomura की पसंद?
Nomura रिसर्च ने भारतीय स्टील सेक्टर पर अपनी नई रिपोर्ट में Jindal Steel & Power को खास तवज्जो दी है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, स्टील की कीमतों, खासकर रीबार जैसे लॉन्ग प्रोडक्ट्स में चल रहे रुझान, कंपनी के लिए एक बढ़िया मौका बना रहे हैं। यह उम्मीद इस बात से और मजबूत होती है कि कंपनी की नई क्षमताएं (capacities) जब पूरी तरह चालू हो जाएंगी, तो उसकी ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार होगा।
Nomura का Jindal Steel पर 'tactical opportunity' के तौर पर ध्यान देने की वजह यह है कि कंपनी का लॉन्ग स्टील प्रोडक्ट्स पर खासा फोकस है, जिनका इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर होता है। 21 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, डोमेस्टिक रीबार की कीमतें ₹600 प्रति टन बढ़कर ₹53,700 प्रति टन पर पहुंच गईं। इसी तरह, हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतें ₹500 प्रति टन बढ़कर ₹58,550 प्रति टन हो गईं। हालांकि, पहले Jindal Steel की नई क्षमता विस्तार की टाइमिंग के कारण ऑपरेटिंग कॉस्ट थोड़ी ज्यादा थी, लेकिन अब ब्रोकरेज को उम्मीद है कि ये आंकड़े सामान्य हो जाएंगे, जिससे कंपनी को बेहतर ऑपरेशनल लिवरेज का फायदा मिलेगा।
Tata Steel और JSW Steel का क्या है आउटलुक?
जहां Jindal Steel को 'tactical' मौके के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं Nomura का रुख दूसरे बड़े स्टील प्लेयर्स के लिए भी पॉजिटिव बना हुआ है। ब्रोकरेज ने JSW Steel और Tata Steel, दोनों पर अपनी 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है। JSW Steel में वॉल्यूम ग्रोथ की सबसे मजबूत क्षमता देखी जा रही है, और अनुमान है कि चालू फाइनेंशियल ईयर में इसके स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों ऑपरेशंस में लगातार ग्रोथ जारी रहेगी। वहीं, Tata Steel से उम्मीद है कि यह अपनी कॉस्ट को स्थिर रखेगा और वॉल्यूम ग्रोथ भी ठीक-ठाक रहेगी, जिससे यह सेक्टर में एक स्थिर खिलाड़ी बना रहेगा।
सेक्टर के रुझान और निवेशकों के लिए जोखिम
Nomura का मानना है कि भारतीय स्टील इंडस्ट्री नियर-टर्म चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि स्टील प्रोड्यूसर्स चालू फाइनेंशियल ईयर के अंत या अगले साल की शुरुआत में कीमतों में बढ़ोतरी की योजना बना रहे हैं। ये बढ़ोतरी संभावित लागत दबावों, जैसे कि पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी सप्लाई चेन की जटिलताओं से होने वाले खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होंगी।
हालांकि, निवेशकों को संभावित जोखिमों से भी अवगत रहना चाहिए। स्टील इंडस्ट्री ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है, खासकर कोकिंग कोल और आयरन ओर की लागत, जिसका सीधा असर प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है। इसके अलावा, यह सेक्टर ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता और सरकारी व्यापार नीतियों या आयात शुल्कों में संभावित बदलावों के प्रति भी संवेदनशील है। Jindal Steel जैसी कंपनियों के लिए, एक महत्वपूर्ण बात यह है कि नई उत्पादन क्षमता का सफलतापूर्वक और समय पर रैंप-अप हो। निवेशक यह भी ट्रैक कर सकते हैं कि ये कंपनियां विस्तार करते समय अपने कर्ज के स्तर को कितनी कुशलता से प्रबंधित करती हैं, साथ ही भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी का मांग पर वास्तविक प्रभाव क्या होता है।
