Niva Bupa Health Insurance ने शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले **93%** बढ़कर **₹1.4 अरब** पर पहुंच गया है। रेवेन्यू में भी **29%** का उछाल देखा गया, जिसका मुख्य कारण रिटेल हेल्थ सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने स्टॉक पर **₹103** के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की है।
Niva Bupa की दमदार शुरुआत
Niva Bupa Health Insurance Company ने नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत धमाकेदार की है। कंपनी का आफ्टर टैक्स प्रॉफिट 30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही में दोगुना से अधिक होकर ₹1.4 अरब हो गया है। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों से काफी बेहतर है, क्योंकि पहले ₹985 मिलियन के मुनाफे का अनुमान लगाया गया था। कंपनी का इंश्योरेंस रेवेन्यू भी इस तिमाही में 29% बढ़कर ₹22.7 अरब रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एक बड़ी छलांग है।
रिटेल सेगमेंट ने भरी उड़ान
कंपनी की इस ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह इसका रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट रहा। इस सेगमेंट में ग्रॉस रिटेन प्रीमियम में 47% का भारी इजाफा हुआ और यह ₹16.1 अरब तक पहुंच गया। यह दिखाता है कि Niva Bupa कॉम्पिटिटिव हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत बना रही है। कुल मिलाकर, कंपनी का टोटल ग्रॉस प्रीमियम भी तिमाही के दौरान 32% बढ़कर ₹21.5 अरब हो गया।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी का कमाल
ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर कंपनी के फोकस से प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार हुआ है। कंपनी का कंबाइंड इंश्योरेंस सर्विस रेश्यो (Combined Insurance Service Ratio) 300 बेसिस पॉइंट सुधरकर 100.2% पर आ गया है, जो कि अनुमानित 103.5% से काफी बेहतर है। इससे पता चलता है कि Niva Bupa ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी के करीब पहुंच रही है। इंश्योरेंस सर्विस रिजल्ट पिछले साल की इसी तिमाही के ₹76 मिलियन से बढ़कर ₹1 अरब हो गया। इसके अलावा, इन्वेस्टमेंट इनकम में भी 21% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹2 अरब पर पहुंच गई।
ब्रोकरेज की राय
इन नतीजों के बाद, Motilal Oswal ने Niva Bupa पर 'Buy' रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है और शेयर के लिए ₹103 का टारगेट प्राइस सेट किया है। ब्रोकरेज का वैल्यूएशन फिस्कल ईयर 2028 के अनुमानित ईपीएस (Earnings Per Share) पर आधारित है, जिसमें कंपनी के Ind AS अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स में बदलाव का भी ध्यान रखा गया है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity) भी सुधरकर 3.7% हो गया है, जो पिछले साल की पहली तिमाही में 2.1% था।
आगे क्या?
निवेशकों को अब कंपनी की रिटेल हेल्थ ग्रोथ को बनाए रखने की क्षमता और कंबाइंड रेशियो को 100% से नीचे लाने की कोशिशों पर नजर रखनी होगी। हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए, लगातार ग्रोथ रेट्स और क्लेम रेशियो को मैनेज करने की कंपनी की काबिलियत आने वाली तिमाहियों में अहम साबित होगी।
