Niva Bupa Share Price: ब्रोकरेज Motilal Oswal ने ₹97 का Target दिया, Profit में 67% की बड़ी छलांग!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Niva Bupa Share Price: ब्रोकरेज Motilal Oswal ने ₹97 का Target दिया, Profit में 67% की बड़ी छलांग!

Niva Bupa Health Insurance के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Securities (MOSL) ने कंपनी पर भरोसा जताते हुए ₹97 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। यह तब हुआ है जब कंपनी ने मार्च तिमाही (Q4) में अपने नेट प्रॉफिट में **67%** का शानदार उछाल दर्ज किया है।

Q4 में Niva Bupa का प्रदर्शन कैसा रहा?

Niva Bupa ने हाल ही में अपने Q4 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹206 करोड़ से बढ़कर ₹345 करोड़ हो गया है। यह 67% की बढ़ोतरी है। वहीं, कंपनी की कुल आय भी ₹1,565 करोड़ से बढ़कर ₹2,078 करोड़ हो गई है। इंश्योरेंस सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण आंकड़ा, ग्रॉस रिटन प्रीमियम (GWP), भी ₹2,880 करोड़ तक पहुंच गया, जो कंपनी के बढ़ते बिजनेस वॉल्यूम को दर्शाता है।

रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पर फोकस क्यों?

Niva Bupa रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह कॉर्पोरेट ग्रुप इंश्योरेंस पर अपनी निर्भरता कम करे, क्योंकि रिटेल हेल्थ पॉलिसीज को ज्यादा स्थिर और लंबे समय तक चलने वाला रेवेन्यू सोर्स माना जाता है। फाइनेंशियल ईयर 26 में, कंपनी ने रिटेल मार्केट शेयर में 10.1% की हिस्सेदारी हासिल की है, जो पिछले साल से 76 बेसिस पॉइंट ज्यादा है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी मल्टी-चैनल इंजन बना रही है, जिससे वह एजेंट्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और पार्टनशिप्स के जरिए ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच सकेगी।

सॉल्वेन्सी रेश्यो और रेगुलेटरी जरूरत

हालांकि कंपनी का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन निवेशकों की नजर सॉल्वेन्सी रेश्यो पर भी है, जो इंश्योरर की वित्तीय मजबूती को बताता है। 31 मार्च, 2026 तक Niva Bupa का सॉल्वेन्सी रेश्यो 2.49 था, जो पिछले साल के 3.03 से कम है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि IRDAI (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया) द्वारा निर्धारित न्यूनतम आवश्यकता 1.5 है। रेश्यो में गिरावट के बावजूद, कंपनी इस जरूरी सीमा से काफी ऊपर है, जिसका मतलब है कि वह अपने क्लेम दायित्वों को पूरा करने के लिए अच्छी तरह से पूंजीकृत है।

बढ़ते खर्चों का असर

हेल्थ इंश्योरेंस बिजनेस को बढ़ाने में खर्च भी बढ़ता है। इस तिमाही में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹1,795 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹1,470 करोड़ था। यह उन इंश्योरेंस कंपनियों के लिए आम बात है जो तेजी से ग्रोथ कर रही हैं और कस्टमर एक्विजिशन, कमीशन और टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश कर रही हैं। कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि बढ़ते बिजनेस के साथ-साथ वह इन खर्चों को भी नियंत्रण में रखे। ब्रोकरेज ने फाइनेंशियल ईयर 28 तक कंबाइंड इंश्योरेंस सर्विस रेशियो (CISR) को 100.1% पर लाने का अनुमान लगाया है।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशक कंपनी की प्रगति का आकलन करने के लिए कुछ प्रमुख बातों पर नजर रखेंगे। पहला, नए नेतृत्व का परिचालन रणनीति पर क्या असर पड़ता है, खासकर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और डिप्टी सीईओ, अंकुर खरबंदा की नियुक्ति के बाद। दूसरा, क्लेम सेटलमेंट रेशियो का ट्रेंड; यह 94.4% तक सुधरा है, लेकिन बढ़ते ग्राहक आधार के साथ इसे बनाए रखना या सुधारना महत्वपूर्ण होगा। और तीसरा, कंपनी अपनी आक्रामक विस्तार रणनीति के साथ-साथ सॉल्वेन्सी लेवल्स को कैसे बनाए रखती है, यह देखना लंबी अवधि की स्थिरता के लिए अहम होगा।

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