बाजार में जारी उठापटक के बीच Nifty Smallcap 250 और Nifty Midcap 150 इंडेक्स अपने अक्टूबर 2026 के निचले स्तरों से संभलते दिख रहे हैं। स्मॉलकैप सेगमेंट में तकनीकी मजबूती साफ नजर आ रही है, हालांकि आगे की चाल कंपनियों के नतीजों और विदेशी निवेश पर टिकी है।
भारतीय शेयर बाजार में नवंबर की शुरुआत के साथ ही रिकवरी का दौर देखने को मिल रहा है। 3 नवंबर 2026 तक, Nifty Smallcap 250 इंडेक्स 17,108 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले महीने के 16,135 के निचले स्तर से एक बड़ी राहत है। इसी तरह, Nifty Midcap 150 इंडेक्स भी संभलकर 21,487 पर कारोबार कर रहा है, जो अक्टूबर में 20,336 तक गिर गया था।
टेक्निकल चार्ट पर क्या है स्थिति?
तकनीकी जानकारों के मुताबिक, स्मॉलकैप इंडेक्स अपने 200-डे मूविंग एवरेज (करीब 16,950) के ऊपर टिका हुआ है, जो लॉन्ग-टर्म ट्रेंड के लिए एक पॉजिटिव संकेत माना जाता है। वहीं, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स अपने 20-डे मूविंग एवरेज यानी 21,400 के आसपास संघर्ष कर रहा है। दोनों इंडेक्स अपने अक्टूबर के निचले स्तरों से लगभग 6% की रिकवरी दर्ज कर चुके हैं, लेकिन अभी भी अपने अगस्त और सितंबर के हाई (Midcap: 23,647.50; Smallcap: 18,551) से नीचे हैं।
अर्निंग्स सीजन का प्रभाव
इस रिकवरी के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर मौजूदा कॉर्पोरेट अर्निंग्स सीजन है। मिडकैप कंपनियां लगातार अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश कर रही हैं, जिससे मार्केट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। निवेशक प्रॉफिट मार्जिन और ग्रोथ को लेकर बेहद सतर्क हैं।
आगे की राह और चुनौतियां
बाजार पर कच्चे तेल की कीमतें, मिडिल ईस्ट के जियोपॉलिटिकल तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के निवेश का बड़ा असर है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए, तो पिछले 20 सालों में 14 बार नवंबर का महीना स्मॉलकैप इंडेक्स के लिए अच्छा रहा है, जिसमें औसतन 4.68% की बढ़त देखी गई है। हालांकि, निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मौजूदा तेजी जारी रह पाएगी या इंडेक्स अपने अगले रेजिस्टेंस लेवल पर जाकर रुक जाएंगे।
