ग्लोबल और घरेलू मोर्चे पर बढ़ते दबाव के चलते Nifty 50 ने **22,179.90** का नया 52-वीक लो (Low) छुआ है। बाजार में **1.64%** की गिरावट आई है, क्योंकि क्रूड ऑयल **$104** के पार पहुंच गया है और RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर **5.50%** कर दिया है।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी 22,179.90 के इंट्राडे लो को छूने के बाद 22,231.80 पर बंद हुआ। यह गिरावट घरेलू और ग्लोबल आर्थिक चुनौतियों का नतीजा है, जिसने हर सेक्टर के वैल्युएशन पर दबाव डाल दिया है।
बिकवाली की असली वजह
बाजार पर इस समय 'परफेक्ट स्टॉर्म' का साया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल $104 प्रति बैरल के पार चला गया है, जिससे भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ रहा है और महंगाई का खतरा गहरा गया है। इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के पार फिसल गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा तोड़ा है, जिन्होंने एक ही सेशन में ₹6,121 करोड़ के शेयर बेच डाले हैं।
RBI का एक्शन और ब्याज दर
RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। सेंट्रल बैंक का 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख यह बताता है कि महंगाई को लेकर उनका रवैया बेहद सख्त है। ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों की बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसका सीधा असर बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
टेक्निकल और सेक्टर ट्रेंड
बाजार लगातार नौवें हफ्ते गिरावट के दौर में है। निफ्टी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। मेटल, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर सबसे ज्यादा पिटे हैं। फिलहाल आईटी जैसे डिफेंसिव सेक्टर ही थोड़ा सहारा दे रहे हैं।
आगे क्या करें निवेशक?
अब नजरें कंपनियों के अर्निंग्स सीजन पर टिकी हैं कि वे बढ़ती लागत और ब्याज दरों को कैसे मैनेज करती हैं। टेक्निकल नजरिए से 21,950 और 21,770 पर सपोर्ट लेवल दिख रहे हैं। क्रूड ऑयल की चाल और ग्लोबल सेंट्रल बैंकों के फैसलों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
