भारतीय शेयर बाजार का बेंचमार्क इंडेक्स Nifty पिछले कुछ समय में **4%** नीचे फिसला है। हालांकि, Kotak Neo के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एंट्री का एक बेहतर मौका हो सकती है, बशर्ते ग्लोबल संकेतों पर नजर रखी जाए।
हाल ही में Nifty में आई 4% की करेक्शन को Kotak Neo रिसर्च ने वैल्यूएशन के लिहाज से एक 'रीसेट' बताया है। इस गिरावट के साथ इंडेक्स 22,200 के अहम सपोर्ट लेवल के करीब आ गया है, जिसे मार्केट एक्सपर्ट्स स्टेबिलिटी के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण मान रहे हैं। तेजी को दोबारा रफ्तार पकड़ने के लिए इंडेक्स को 22,800 के रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर निकलना होगा, जिसके बाद ही यह 23,200 की ओर कदम बढ़ा सकता है।
सेक्टर ट्रेंड्स और स्ट्रैटेजी
मौजूदा बाजार में इंस्टिट्यूशनल निवेशक अब उन सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं जो डिफेंसिव ग्रोथ दे रहे हैं। प्राइवेट बैंकिंग इस समय निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई है, जिसके पीछे बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट मुख्य कारण है। इसके अलावा, सरकारी खर्च और मजबूत ऑर्डर बुक की बदौलत डिफेंस सेक्टर भी फोकस में है। फार्मा सेक्टर में भी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के चलते अच्छी तेजी देखी जा रही है।
इसके उलट, इंश्योरेंस और हॉस्पिटल सेक्टर के सामने रेगुलेटरी दबाव की चुनौतियां हैं, जिससे उनकी अर्निंग्स विजिबिलिटी पर असर पड़ा है। साथ ही, कमोडिटी-लिंक्ड स्टॉक्स पर भी डॉलर इंडेक्स की मजबूती का दबाव बना हुआ है।
रिस्क और मार्केट वॉच
बाजार पर अभी भी ग्लोबल फैक्टर्स का भारी असर है, जिनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की पॉलिसी और जियो-पॉलिटिकल तनाव शामिल हैं। सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें हैं; यदि ये $120 प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो यह कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर डाल सकती हैं। निवेशकों को 22,200 के सपोर्ट लेवल पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि बाजार की आगे की दिशा इसी सपोर्ट की स्थिरता पर टिकी है।
