Nifty, Bank Nifty में स्थिरता: RBI पॉलिसी का इंतज़ार, कच्चा तेल देगा राहत?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Nifty, Bank Nifty में स्थिरता: RBI पॉलिसी का इंतज़ार, कच्चा तेल देगा राहत?

5 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार एक सतर्कता भरी चाल में हैं, क्योंकि निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मॉनेटरी पॉलिसी के नतीजों का इंतज़ार कर रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी कुछ राहत दे रही है, लेकिन चार दिन की तेज़ी के बाद हो रही प्रॉफिट-बुकिंग ने Nifty 50 और Bank Nifty को दायरे में रखा है। बाज़ार प्रतिभागी F&O स्टॉक्स के लिए नए शुरू हुए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।

RBI पॉलिसी पर टिकी बाज़ार की नज़र

भारतीय शेयर बाज़ारों में 5 अगस्त 2026 को कंसोलिडेशन का दौर चल रहा है, क्योंकि सारा ध्यान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले पर है। 3 अगस्त को Nifty 50 ने पांच महीने का उच्च स्तर 24,774 छुआ था, लेकिन 4 अगस्त को यह 24,615 पर बंद हुआ। यह गिरावट हाल की तेज़ी के दौरान लॉन्ग पोजीशन बनाने वाले ट्रेडरों द्वारा की गई प्रॉफिट-बुकिंग मानी जा रही है।

RBI का फैसला, बाज़ार की दिशा

आज आने वाला RBI का फैसला बाज़ार की दिशा तय करेगा। निवेशक ब्याज दरों और लिक्विडिटी की स्थिति पर स्पष्टता चाहते हैं, जो आमतौर पर बैंकिंग शेयरों और व्यापक बाज़ार की भावना को प्रभावित करते हैं। Bank Nifty, जो 58,500 के रेजिस्टेंस लेवल को पार करने की कोशिश कर रहा था, उसने भी एक मामूली गिरावट देखी है, क्योंकि ट्रेडर्स घोषणा से पहले बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। बाज़ार प्रतिभागी आम तौर पर महंगाई और आर्थिक विकास पर रेगुलेटर के रुख को समझने के लिए कमेंट्री का इंतज़ार करते हैं, इससे पहले कि वे नया पैसा लगाएं।

कच्चे तेल का खेल और नई ट्रेडिंग

घरेलू पॉलिसी की अनिश्चितता के बीच, बाहरी कारक मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित राजनयिक विकास को लेकर आशावाद है। चूंकि भारत कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक है, इसलिए कम कीमतें आम तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक होती हैं और महंगाई को कम करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, इस सकारात्मक प्रभाव को शॉर्ट-टर्म टेक्निकल सेलिंग प्रेशर का सामना करना पड़ रहा है।

निवेशक 3 अगस्त 2026 से शुरू हुए F&O सेगमेंट के लिए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के प्रभाव पर भी नज़र रख रहे हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य डेरिवेटिव्स में एंड-ऑफ़-डे की अस्थिरता को प्रबंधित करना और प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाना है। चूंकि यह बाज़ार के बंद होने के तरीके में एक संरचनात्मक बदलाव है, इसलिए ऐतिहासिक टेक्निकल पैटर्न को नए सिरे से व्याख्या करने की आवश्यकता हो सकती है। इंडेक्स वर्तमान में प्रमुख मूविंग एवरेज से ऊपर कारोबार कर रहा है, लेकिन तत्काल ट्रेंड RBI के पॉलिसी स्टेटमेंट पर बाज़ार की प्रतिक्रिया और आने वाले सत्रों में महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.