बाजार में जारी अस्थिरता के बीच एनालिस्ट्स ने Nifty 50 के उन चुनिंदा शेयरों पर दांव लगाने की सलाह दी है, जिनका कंपोजिट परफॉर्मेंस स्कोर शानदार है। विदेशी निवेशकों की निकासी और रुपये के दबाव के बावजूद ये शेयर फंडामेंटल और मोमेंटम के दम पर मजबूती दिखा रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर रहा है। Nifty 50 और Sensex में रिकवरी के बावजूद निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स ने डेटा-ड्रिवेन अप्रोच अपनाते हुए उन शेयरों को चुना है, जो मार्केट की गिरावट के बीच भी लचीलापन दिखा रहे हैं। Institutional Brokers' Estimate System (IBES) और Stock Reports Plus के जरिए इन शेयरों को 8 से 10 के बीच कंपोजिट स्कोर दिया गया है।
एनालिस्ट्स का फॉर्मूला क्या है?
ये स्कोर केवल अटकलों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक मल्टी-फैक्टर मॉडल से तैयार किया गया है। इसमें अर्निंग रिपोर्ट्स, फंडामेंटल मजबूती, वैल्यूएशन, रिस्क और प्राइस मोमेंटम जैसे पहलुओं को बराबर महत्व दिया जाता है। इसका उद्देश्य स्पेकुलेशन को हटाकर उन कंपनियों पर फोकस करना है, जिनका बिजनेस ग्राउंड लेवल पर मजबूत है।
उदाहरण के तौर पर, Bajaj Finance का नाम चर्चा में है। कंपनी ने Q2FY27 में शानदार नतीजे पेश किए हैं और ₹17,500 करोड़ तक फंड जुटाने का ऐलान किया है, जो इसके स्कोर को वैलिडिटी देता है।
बाजार की हकीकत और जोखिम
हालांकि क्वांटिटेटिव स्कोरिंग रिसर्च में मदद करती है, लेकिन बड़े आर्थिक खतरे अभी भी बने हुए हैं। Nifty 50 फिलहाल अपने 50-डे और 200-डे मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो तकनीकी जानकारों के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और Brent क्रूड ऑयल का $100 प्रति बैरल से ऊपर रहना बाजार पर भारी पड़ रहा है। रुपया भी डॉलर के मुकाबले ₹96.7–96.9 के आसपास दबाव में है।
हालांकि, Tata Consultancy Services जैसे IT दिग्गज नतीजों के दम पर स्थिरता प्रदान कर रहे हैं, लेकिन मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां अभी भी निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क हैं। याद रखें, ये स्कोर पास्ट परफॉर्मेंस को दर्शाते हैं, भविष्य की गारंटी नहीं। निवेश से पहले कंपनियों के डेट मैनेजमेंट और मार्जिन पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
