Nifty 50 Strategy: बाजार की सुस्ती में कैसे बचें? डेटा स्कोरिंग के जरिए चुनें दमदार स्टॉक्स

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nifty 50 Strategy: बाजार की सुस्ती में कैसे बचें? डेटा स्कोरिंग के जरिए चुनें दमदार स्टॉक्स

लगातार चार हफ्तों की गिरावट के बाद Nifty 50 में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में मार्केट एक्सपर्ट्स अब इंस्टीट्यूशनल-ग्रेड स्कोरिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि फंडामेंटली मजबूत कंपनियों की पहचान की जा सके और FII की बिकवाली जैसी चुनौतियों से बचा जा सके।

पिछले 4 हफ्तों से Nifty 50 इंडेक्स काफी दबाव में है। इंडेक्स के अपने 20, 50, 100 और 200-डे मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करने के कारण मार्केट अब एक सतर्क मोड में है। सेंटीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय, अब एक्सपर्ट्स एक सख्त डेटा-आधारित अप्रोच अपना रहे हैं।

एनालिटिकल स्क्रीनिंग का तरीका

एनालिस्ट्स फिलहाल Refinitiv द्वारा संचालित 'Stock Reports Plus' फ्रेमवर्क का उपयोग कर रहे हैं। इसके तहत Nifty 50 की कंपनियों को 1 से 10 के बीच स्कोर दिया जाता है। यह सिस्टम अर्निंग्स, फंडामेंटल हेल्थ, वैल्युएशन, रिस्क प्रोफाइल और प्राइस मोमेंटम जैसे 5 अहम पैमानों पर आधारित है। जिन स्टॉक्स को 8 से 10 का स्कोर मिलता है, उन्हें स्थिर माना जा रहा है क्योंकि उनका मुनाफा और कर्ज का स्तर बेहतर होता है।

मार्केट पर दबाव के प्रमुख कारण

भारतीय बाजारों के लिए फिलहाल कई चुनौतियां हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $95 से $96 प्रति बैरल के पास बनी हुई हैं, जो महंगाई और कॉर्पोरेट मार्जिन पर सीधा असर डाल रही हैं। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी अनिश्चितता ने बाजार की संवेदनशीलता बढ़ा दी है।

टेक्निकल लेवल्स पर नजर

फिलहाल, Nifty 50 के लिए 23,600 से 23,800 का दायरा एक मजबूत सपोर्ट जोन की तरह काम कर रहा है। यदि इंडेक्स इसे नहीं थाम पाता है, तो और गिरावट आ सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 24,000 से 24,050 के लेवल पर कड़ा रेजिस्टेंस है। आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों की अर्निंग्स स्टेबिलिटी और डिविडेंड कंसिस्टेंसी पर बारीक नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.