बाजार की उठा-पटक के बीच, निवेशक अब Nifty 50 शेयरों को फिल्टर करने के लिए एक नए क्वांटिटेटिव फ्रेमवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह **5-फैक्टर** मॉडल कंपनी के मुनाफे, फंडामेंटल्स और वैल्यूएशन के आधार पर स्कोर देता है, जो रिसर्च की शुरुआत के लिए एक बेहतर टूल है।
Nifty 50 इंडेक्स में शामिल कंपनियों को लेकर निवेशकों का नजरिया अब डेटा-बेस्ड हो रहा है। Refinitiv के डेटा पर आधारित यह नया फ्रेमवर्क एक स्टैंडर्ड स्कोरिंग सिस्टम पेश करता है, जिसका मकसद निवेश के फैसलों में से इमोशनल बायस को हटाना है। इस सिस्टम में 1 से 10 तक के स्कोर दिए जाते हैं, जिसमें 8 से 10 का स्कोर कंपनी की मजबूती का संकेत माना जाता है।
ये 5 पिलर्स क्या हैं?
यह मॉडल शेयरों को पांच मुख्य आधारों पर मापता है:
- अर्निंग क्वालिटी: कंपनी बाजार के अनुमानों पर कितना खरा उतर रही है और क्या उसके फॉरकास्ट को ऊपर की ओर रिवाइज किया गया है।
- फंडामेंटल स्ट्रेंथ: इसमें प्रॉफिटेबिलिटी, कर्ज का स्तर और डिविडेंड देने का रिकॉर्ड देखा जाता है।
- रिलेटिव वैल्यूएशन: यह मौजूदा प्राइस की तुलना उसके 5 साल के औसत और सेक्टर के साथियों से करता है (जैसे P/E और P/S रेशियो)।
- रिस्क असेसमेंट: इसे बीटा (Beta) के जरिए मापा जाता है, जो यह बताता है कि ब्रॉडर मार्केट की तुलना में शेयर कितना उतार-चढ़ाव दिखाता है।
- प्राइस मोमेंटम: यह मौजूदा मार्केट ट्रेंड को ट्रैक करता है कि शेयर लगातार ऊपर जा रहा है या नहीं।
सावधानी भी जरूरी
हालांकि यह मॉडल मार्केट का शोर (Market Noise) कम करने में मदद करता है, लेकिन इसे अंतिम फैसला न मानें। यह बीते डेटा पर आधारित है, इसलिए अचानक हुए मैनेजमेंट बदलाव या किसी रेगुलेटरी जांच जैसे क्वालिटेटिव फैक्टर्स को यह तुरंत नहीं पकड़ पाता। निवेशकों को चाहिए कि वे इसे सिर्फ एक 'फर्स्ट-लेवल फिल्टर' की तरह इस्तेमाल करें और अंतिम निवेश से पहले खुद फंडामेंटल एनालिसिस जरूर करें।
