ग्लोबल तनाव और Nifty 50 के **24,100** के नीचे फिसलने से निवेशक डरे हुए हैं। ऐसे में एनालिस्ट्स अब डेटा-बेस्ड 'Strong Buy' रेटिंग का सहारा ले रहे हैं, ताकि खराब बाजार में भी मजबूत कंपनियों को ढूंढा जा सके।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। 31 अगस्त 2026 को Nifty 50 इंडेक्स 24,100 के अहम स्तर के नीचे ट्रेड करता नजर आया। इस गिरावट की मुख्य वजह US और Iran के बीच बढ़ता तनाव है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों और सप्लाई चेन पर संकट के बादल छा गए हैं। इसके अलावा, US Federal Reserve के चेयरमैन केविन वॉर्श के हालिया बयानों के बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।\n\nइस उठापटक के माहौल में, इंस्टिट्यूशनल एनालिस्ट्स अब स्टेबिलिटी के लिए डेटा पर भरोसा कर रहे हैं। वे 'Institutional Brokers' Estimate System' (IBES) का इस्तेमाल कर Nifty 50 की कंपनियों को 1 से 10 तक स्कोर दे रहे हैं। जिन कंपनियों को 8 या उससे ज्यादा का स्कोर मिल रहा है, उन्हें 'Strong Buy' की श्रेणी में रखा गया है।\n\nयह स्क्रीनिंग प्रोसेस सिर्फ शॉर्ट-टर्म ट्रेंड्स पर नहीं, बल्कि पांच मुख्य पैमानों पर काम करती है: कॉर्पोरेट अर्निंग्स, फंडामेंटल मजबूती, वैल्युएशन, मार्केट रिस्क और प्राइस मोमेंटम। एनालिस्ट्स कंपनियों के कर्ज प्रबंधन और पिछले 5 सालों के मुनाफे का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं ताकि बाजार के शोर को पीछे छोड़कर बेहतरीन बिजनेस को चुना जा सके।\n\nहालांकि, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ये स्कोर केवल एक टूल हैं, गारंटी नहीं। फिलहाल, बाजार की नजरें 23,800 से 23,900 के सपोर्ट जोन पर टिकी हैं। अगर इंडेक्स इससे नीचे गिरता है, तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह है कि पूरे मार्केट पर दांव लगाने के बजाय, कंपनी-स्पेसिफिक फंडामेंटल्स, कर्ज घटाने की क्षमता और मार्जिन स्टेबिलिटी जैसे डेटा पर फोकस करें।
