लगातार 8 हफ्तों की गिरावट के बाद आखिरकार Nifty 50 ने राहत की सांस ली है और इंडेक्स **22,520.45** के स्तर पर बंद हुआ है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह रिकवरी अभी काफी कमजोर है और ग्लोबल रिस्क के चलते बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
लगातार 8 हफ्तों से जारी गिरावट का सिलसिला टूट गया है। Nifty 50 के 22,520.45 पर बंद होने से निवेशकों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स ने अभी सतर्क रहने की सलाह दी है। चार्ट्स पर मार्केट का स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर नजर आ रहा है, जब तक कि कोई ठोस ट्रेंड न दिखे, सावधानी ही बेहतर है।
सपोर्ट और रेजिस्टेंस का गणित
इन्वेस्टर्स के लिए फिलहाल 22,200 से 22,350 का जोन एक मजबूत सपोर्ट के तौर पर काम कर रहा है। अगर इंडेक्स इस लेवल के नीचे फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ 22,750 से 22,800 पर कड़ा रेजिस्टेंस है। तेजी को कन्फर्म करने के लिए मार्केट को हाई वॉल्यूम के साथ इस रेंज के ऊपर निकलना होगा।
ग्लोबल सिरदर्द और FII का दबाव
बाजार की रिकवरी सीमित रहने के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली, FIIs की लगातार बिकवाली, जिसने लिक्विडिटी कम कर दी है। दूसरी, $100 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ ब्रेंट क्रूड ऑयल, जो महंगाई और कंपनियों के मार्जिन के लिए चिंता का सबब है। इसके अलावा, इंडेक्स अभी भी अपने 200-वीक मूविंग एवरेज को पार करने के लिए जूझ रहा है।
कुछ शेयरों में दिख रही मजबूती
मार्केट की उठापटक के बावजूद कुछ स्टॉक्स अपना दम दिखा रहे हैं। Persistent Systems के चार्ट्स पर कंस्ट्रक्टिव पैटर्न दिख रहा है, जबकि Trent ने टेक्निकल शिफ्ट दिखाते हुए मोमेंटम के संकेत दिए हैं। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या Nifty 50 अपने रेजिस्टेंस लेवल को तोड़ पाएगा या ग्लोबल हेडविंड्स इसे वापस नीचे ले आएंगे।
