Nifty 50 में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है और यह **23,600** के अहम सपोर्ट लेवल के नीचे फिसल गया है। ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव बाजार की चिंताएं बढ़ा रहे हैं।
भारतीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। 11 सितंबर को Nifty 50 सूचकांक 23,398 के स्तर पर बंद हुआ, जो यह दर्शाता है कि पहले जिस 23,600 के स्तर को बाजार का मजबूत आधार माना जा रहा था, वह अब रेजिस्टेंस (Resistance) में बदल गया है।\n\n### गिरावट की मुख्य वजहें\nबाजार की इस कमजोरी के पीछे ग्लोबल फैक्टर्स का बड़ा हाथ है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें बढ़कर $104 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, अमेरिका के ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yields) में बढ़ोतरी ने भी इमर्जिंग मार्केट्स से निवेश को प्रभावित किया है।\n\n### FIIs बनाम DIIs की लड़ाई\nमार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बीच संस्थागत निवेशकों का रुख बिल्कुल अलग है। जहां एक तरफ FIIs (विदेशी संस्थागत निवेशक) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, वहीं DIIs (घरेलू संस्थागत निवेशक) बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं।\n\n### बैंकिंग सेक्टर का हाल\nNifty Bank इंडेक्स भी दबाव में है और 56,700-56,800 की रेंज में भारी रेजिस्टेंस का सामना कर रहा है। निवेशकों की नजर अब 56,000-56,200 के सपोर्ट जोन पर टिकी है। अगर गिरावट का यह सिलसिला जारी रहता है, तो टेक्निकल चार्ट्स के मुताबिक Nifty 50 का अगला पड़ाव 23,000-23,200 का दायरा हो सकता है। अब निवेशकों की निगाहें मिडिल ईस्ट के हालात और ग्लोबल एनर्जी कीमतों पर हैं।
