Nifty 50 में पिछले **8 हफ्तों** से लगातार गिरावट जारी है, जो पिछले **25 वर्षों** का सबसे लंबा दौर है। FII की बिकवाली और मैक्रो हेडविंड्स के बीच एनालिस्ट्स अब 'Stock Reports Plus' जैसे डेटा-ड्रिवन फ्रेमवर्क्स का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि खराब बाजार में भी मजबूत स्टॉक्स को पहचाना जा सके।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक कठिन दौर से गुजर रहा है। पिछले 8 हफ्तों से बाजार लगातार फिसल रहा है, जो पिछले 25 सालों का रिकॉर्ड है। इस बिकवाली के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की निकासी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल जैसे प्रमुख कारण हैं। इस उठापटक भरे दौर में एनालिस्ट्स अब 'Stock Reports Plus' जैसे क्वांटिटेटिव स्कोरिंग सिस्टम पर भरोसा कर रहे हैं।
कैसे काम करता है यह स्कोरिंग सिस्टम?
यह फ्रेमवर्क स्टॉक्स को 1 से 10 के बीच स्कोर देता है। जो कंपनियां 8 से 10 के बीच स्कोर करती हैं, उन्हें स्थिरता के लिहाज से बेहतर माना जाता है। इसमें पांच प्रमुख मानक देखे जाते हैं: अर्निंग स्टेबिलिटी, फंडामेंटल स्ट्रेंथ, रिलेटिव वैल्यूएशन, रिस्क मैनेजमेंट और प्राइस मोमेंटम। यह निवेशकों को बाजार के शोर से हटकर कंपनी के बिजनेस हेल्थ पर फोकस करने में मदद करता है।
बाजार पर RBI और नतीजों का दबाव
हालांकि ये मॉडल क्वालिटी स्टॉक ढूंढने में मदद करते हैं, लेकिन मैक्रो फैक्टर्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बाजार की नजर अब 7 अक्टूबर को आने वाले RBI के फैसले पर है, जहां 25 बेसिस पॉइंट की रेपो रेट बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। साथ ही, Nifty 50 में BSE की एंट्री और Wipro के बाहर होने से भी पोर्टफोलियो में भारी फेरबदल देखा गया है।
आगे क्या है बड़े ट्रिगर्स?
निवेशकों की नजरें अब 8 अक्टूबर से शुरू होने वाले Q2 FY27 नतीजों पर टिकी हैं, जिसकी शुरुआत Tata Consultancy Services (TCS) से होगी। इन नतीजों से पता चलेगा कि कंपनियां महंगाई और बढ़ती लागत के बीच अपना प्रॉफिट मार्जिन कैसे बचा पा रही हैं।
